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तेरा इंतजार करते-करते (कविता)

ए हसीन लम्हे
जरा आहिस्ता गुजर,
बहुत बरस बिताए हैं
तेरा इंतजार करते-करते।

बहुत तडपे हैं
बहुत रोए हैं
आंसू भी खूब बहाए हैं
हमने आहें भरते-भरते।
बहुत बरस_ _ _ _।

हठ किया है हमने
बादलों से निकलते
चांद की तरह
यहां तक पहुंचे हैं हम
जमाने की नजरों से
डरते- डरते।
बहुत बरस_ _ _ _।

जाने क्या तडप थी
जाने क्या एहसास था
जिंदगी जी आज तक
हमने यूंही मरते-मरते।
बहुत बरस_ _ _ _।

मौलिक व अप्रकाशित

सुरेश कुमार 'कल्याण'

Views: 1073

Comment

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Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 22, 2016 at 4:13pm
आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी कविता पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद ।
Comment by maharshi tripathi on April 14, 2016 at 8:37pm

अत्यंत भाव पूर्ण कविता पर आपको बधाई आ.सुरेश कुमार 'कल्याण सर |

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