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अब समाचार ब्यापार हो गए

अब समाचार ब्यापार हो गए

किसकी बातें सच्ची जानें
अब समाचार ब्यापार हो गए

पैसा जब से हाथ से फिसला
दूर नाते रिश्ते दार हो गए

डिजिटल डिजिटल सुना है जबसे
अपने हाथ पैर बेकार हो गए

रुपया पैसा बैंक तिजोरी
आज जीने के आधार हो गए

प्रेम ,अहिंसा ,सत्य , अपरिग्रह
बापू क्यों लाचार हो गए

सीधा सच्चा मुश्किल में अब
कपटी रुतबेदार हो गए

मौलिक और अप्रकाशित

मदन मोहन सक्सेना

Views: 246

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 10, 2015 at 10:28am
बधाई स्वीकारें
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 10, 2015 at 10:27am
सुंदर रचना के लिए बीढाई स्वीकारें आदरणीय

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