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धरती को पैगाम/नवगीत/कल्पना रामानी

 

इन्द्र्देव ने भेज दिया है

धरती को पैगाम।

 

बूँदों से है लिखी इबारत।  

बदलेगी जन-जन की किस्मत।  

मानसून इस बार करेगा

सबके मन की पूरी हसरत।  

 

भर चौमासा घन बरसेंगे

झूम झूम अविराम।

 

हरषेगा खेतों में हँसिया।

अन्न बीज रोपेगा हरिया।

उड़ जाएगी निकल नीड़ से,

बेबस हो महँगाई चिड़िया।

 

हल बैलों सँग गीत माहिया,

गाएगा सुखराम।   

 

होंगे व्यस्त घरों के कोने।

बाँटेंगे भर दूध भगोने।

इसकी-उसकी टंगी मथानी,

उतरेगी फिर दही बिलोने।

 

तवा तपेली रोज़ तपेंगे,

घर-घर सुबहो-शाम।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by कल्पना रामानी on June 24, 2014 at 9:05am

प्रोत्साहित करने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय गोपाल नारायण जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 23, 2014 at 11:22am

महनीया

अति सुन्दर प्रस्तुति i शब्दों का चयन चमत्कृत करता है i  चलो अच्छे दिन आयेंगे i मोदी नहीं तो इन्द्रदेव लायेंगे i

कृपया ध्यान दे...

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