For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता : विकास का कचरा और कचरे का विकास

शराब की खाली बोतल के बगल में लेटी है

सरसों के तेल की खाली बोतल

 

दो सौ मिलीलीटर आयतन वाली

शीतल पेय की खाली बोतल के ऊपर लेटी है

पानी की एक लीटर की खाली बोतल

 

दो मिनट में बनने वाले नूडल्स के ढेर सारे खाली पैकेट बिखरे पड़े हैं

उनके बीच बीच में से झाँक रहे हैं सब्जियों और फलों के छिलके

 

डर से काँपते हुए चाकलेट और टाफ़ियों के तुड़े मुड़े रैपर

हवा के झोंके के सहारे भागकर

कचरे से मुक्ति पाने की कोशिश कर रहे हैं

 

सिगरेट और अगरबत्ती के खाली पैकेटों के बीच

जोरदार झगड़ा हो रहा है

दोनों एक दूसरे पर बदबू फैलाने का आरोप लगा रहे हैं

 

यहाँ आकर पता चलता है

कि सरकार की तमाम कोशिशों और कानूनों के बावजूद

धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रही हैं पॉलीथीन की थैलियाँ

 

एक गाय जूठन के साथ साथ पॉलीथीन की थैलियाँ भी खा रही है

 

एक आवारा कुत्ता बकरे की हड्डियाँ चबा रहा है

वो नहीं जानता कि जिसे वो हड्डियों का स्वाद समझ रहा है

वो दर’असल उसके अपने मसूड़े से रिस रहे खून का स्वाद है

 

कुछ मैले-कुचैले नर कंकाल कचरे में अपना जीवन खोज रहे हैं

 

पास से गुज़रने वाली सड़क पर

आम आदमी जल्द से जल्द इस जगह से दूर भाग जाने की कोशिश रहा है

क्योंकि कचरे से आने वाली बदबू उसके बर्दाश्त के बाहर है

 

एक कवि कचरे के बगल में खड़ा होकर उस पर थूकता है

और नाक मुँह सिकोड़ता हुआ आगे निकल जाता है

उस कवि से अगर कोई कह दे

कि उसके थूकने से थोड़ा सा कचरा और बढ़ गया है

तो कवि यकीनन उसका सर फोड़ देगा

 

ये विकास का कचरा है

या कचरे का विकास?

--------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 2270

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 4, 2014 at 11:34am

बहुत बहुत शुक्रिया Saurabh जी। आपके सुझाव पर मैं अवश्य विचार करूँगा। स्नेह बना रहे


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 23, 2014 at 3:18am

आदरणीय धर्मेन्द्रजी, प्रस्तुत कविता जिस संवेदना के साथ प्रारम्भ होती है, अपने अंत तक जाते-जाते करारा व्यंग्य बन कर सफलता के साथ उभरती है. प्रयुक्त हुआ प्रत्येक बिम्ब सटीक और चित्रात्मक है.
यह अवश्य है, कि कविता तनिक कम शाब्दिक होती. ऐसी कविताओं का सान्द्र होना अच्छा होता है.
ऐसा मैं अपनी समझ भर ही कह रहा हूँ. वर्ना, आपकी कविता रोमांचित करती है.
इस प्रस्तुति के लिए धन्यवाद.

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 12, 2014 at 8:53pm

शुक्रिया प्राची जी, यहाँ मैंने व्यंग्य नहीं किया है केवल सच को प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त किया है 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 10, 2014 at 10:29am

सार्थक प्रस्तुति आ० धर्मेन्द्र जी 

बधाई स्वीकारिये 

पर ये कविता है या सिर्फ व्यंग ? 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"शुक्रिया आदरणीय। आपने जो टंकित किया है वह है शॉर्ट स्टोरी का दो पृथक शब्दों में हिंदी नाम लघु…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"आदरणीय उसमानी साहब जी, आपकी टिप्पणी से प्रोत्साहन मिला उसके लिए हार्दिक आभार। जो बात आपने कही कि…"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"कौन है कसौटी पर? (लघुकथा): विकासशील देश का लोकतंत्र अपने संविधान को छाती से लगाये देश के कौने-कौने…"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"सादर नमस्कार। हार्दिक स्वागत आदरणीय दयाराम मेठानी साहिब।  आज की महत्वपूर्ण विषय पर गोष्ठी का…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शेष रखने कुटी हम तुले रात भर -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई गिरिराज जी , सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शेष रखने कुटी हम तुले रात भर -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ.भाई आजी तमाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
22 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"विषय - आत्म सम्मान शीर्षक - गहरी चोट नीरज एक 14 वर्षीय बालक था। वह शहर के विख्यात वकील धर्म नारायण…"
23 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . .

कुंडलिया. . .चमकी चाँदी  केश  में, कहे उम्र  का खेल । स्याह केश  लौटें  नहीं, खूब   लगाओ  तेल ।…See More
23 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी लघुकविता का मामला समझ में नहीं आ रहा. आपकी पिछ्ली रचना पर भी मैंने…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भाईजी, आपकी प्रस्तुति का यह लिहाज इसलिए पसंद नहीं आया कि यह रचना आपकी प्रिया विधा…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सुशील सरनाजी, आपकी कुण्डलिया छंद की विषयवस्तु रोचक ही नहीं, व्यापक भी है. यह आयुबोध अक्सर…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service