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आज देखा हमने तिरंगे का बस दो रंग अपने चेहरे पर !

क्यों संसद खामोश और ट्विट्टर चिल्ला रहा ,

क्या बदनसीबी थी हमारी,
हमारा ही रोकेट, हमारे ही घर को जला गया कहीं !

100 मेडल्स जीते हमने इस बार पर,
100 करोड़ की कीमत चूका गया कोई !

ये कैसी विकास गंगा बहा दी अपने देश मे ,
अपने ही लोगो का खून सूखा गया कोई !

ये कैसी छाई है भरष्टाचारी मस्ती हर सर पर ,
हाथो मे थी मशाले, अपनी ही बस्ती जला गया कोई !

गलियों मे होता था शोर, " सचिन आला रे ",
आज वर्ल्डकप को , IPL का प्रेक्टिस मैच बना गया कोई !

माँ से बात को , बड़े ही जतन से बचाए थे मोबाइल मे कुछ पैसे ,
2G और 3G का नाम लेके उसे भी चुरा गया कोई !

बेचारे को आस थी, मिलेगी किताबे और दाखिला कहीं ..
माथे पर डाल उसके भगवा, आरक्षण के एजेंडे पर बहका गया कोई !

महंगी पेट्रोल पर बस भिगो सी ली थी कंठ अपनी,
पर क्यों बेचारे से मुंह का निवाला तक छिनवा गया कोई !

कल तक स्कूल के मंच पर कोई बच्चा पढ़ता था ,
देश गणतंत्र के गुणगान, गाँधी, भगत सुभाष महान,
आज फेसबुक की दीवाल पर कमेंट्स तले उसे दबा गया कोई !

आज देखा हमने तिरंगे का बस दो रंग अपने चेहरे पर ..
0 और 1 का था बस बाईनरी (binary) रंग वहाँ ,
ऑनलाइन नखो से उसे भी निछुर गया कोई !

ऊँचा आसमां, गर्व से लहरा रहा तिरंगा अपना ,
देखो उसके नीचे चुपके से आंसू गिरा रहा कोई !

रचना : सुजीत कुमार लक्की (गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !)


(वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमां , हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल मे है ! !)
My Blog : Sujit Kumar Lucky Live In Own Thoughts

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Comment by Veerendra Jain on January 28, 2011 at 11:18am
गलियों मे होता था शोर, " सचिन आला रे ",
आज वर्ल्डकप को , IPL का प्रेक्टिस मैच बना गया कोई !
Sujit ji...bahut hi badhiya kavita....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 27, 2011 at 9:11am

क्यों संसद खामोश और ट्विट्टर चिल्ला रहा ? बहुत ही वजनदार प्रश्न , भाई ट्विट्टर पर लोक है और संसद मे लोक सेवक तो आज के लोक तंत्र मे तो लोक ही कराहेगा चिलायेगा , संसद को क्या पड़ी है की वो चिलाये |

बहुत ही अच्छी रचना , बधाई हो |

Comment by Abhinav Arun on January 26, 2011 at 9:04pm

सुजीत कुमार जी सुन्दर और चेतना जगाती कविता के लिये बढाए स्वीकारें !

ऊँचा आसमां, गर्व से लहरा रहा तिरंगा अपना ,
देखो उसके नीचे चुपके से आंसू गिरा रहा कोई !
बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं |
Comment by Dinesh Kumar on January 26, 2011 at 11:45am

bahut khob

apaka desh ke prati jajba kabil e taarif hai. aapko bhi ganatantra diwas ki shubhakamanayen.

Comment by Sanjay Kumar Singh on January 26, 2011 at 11:12am
Lucki jee , aap sachmuch lucky hai jo aapkey paas itana badhiya kalam ka gyaan hai , achchi rachna aur Republic day ki badhai hai aapko |
Comment by Sanjay Kumar Singh on January 26, 2011 at 10:46am
sujit jee, achchi rachna hai , ho rahi ghatnaon par aapki achhi pakad hai | Happy Republic Day

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