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लिटाया तकिये पे हौले से थपकियाँ देकर .
और परियों की कहानी भी सुना डाली हैं...
उनींदी रात ये जगार की एक जिद सी लिए बैठी है...
चाँद आये तौ मैं कह दूंगा सुला दौ इसको...
तमाम ख्वाब मेरे खिडकियों पे बैठे हैं....

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Comment by Sudhir Sharma on December 12, 2010 at 1:13pm

धन्यवाद भास्कर जी

Comment by Bhasker Agrawal on December 11, 2010 at 6:42pm

बहुत खूब सुधीर जी 

Comment by Sudhir Sharma on December 11, 2010 at 5:13pm

शुक्रिया रवि जी...

Comment by Rash Bihari Ravi on December 11, 2010 at 12:39pm

khubsurat lajabab

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