For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क्या न लिखूँ

दोपहर घर में बैठा मैं, कुछ,
सोच रहा,मस्तिस्क में आ रहे,
विषय कई,पर उलझन है की,
क्या लिखूँ और क्या न लिखूँ ।

शब्दों और वाणी में, आज,
अनुशासन है नहीं, फिर भी,
समय देशकाल को विचारकर,
क्या लिखूँ और क्या न लिखूँ ।

लिखने से तूफ़ान आ जाता,
लिखने से संबंध बिगड़ते,और,
सत्ता गिर जाती है ,इसीलिये,
क्या लिखूँ और क्या न लिखूँ ।

लिखने से मन के भाव आते,
कटु सत्य निकल जाता है,
आ जाता भूचाल इससे,अतः,
क्या लिखूँ और क्या न लिखूँ ।

पढ़ा जाता है,जो लिखा होता है,
सत्य है,जो लिख दिया जाता है,
लिखने पढ़ने को ध्यान रखकर,
क्या लिखूँ और क्या न लिखूँ ।

आडवाणी ने कुछ लिखा था,
जिन्ना की मज़ार पर,अलग-थलग,
पड़ गए,न होता ऐसा यदि सोच लेते,
क्या लिखूँ और क्या न लिखूँ ।

Views: 198

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by akhilesh mishra on April 11, 2013 at 5:28pm

धन्यवाद लक्ष्मण प्रसाद जी ।लेकिन आज के युग में हर कोई अपनी  बात कहना चाहता है पर दूसरे की बात सुनना नहीं चाहता ।

 

Comment by akhilesh mishra on April 11, 2013 at 5:26pm

धन्यवाद पटेल जी । आपने बिल्कुल सही कहा है ।

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 11, 2013 at 12:37pm

ये प्रश्न हमेशा से प्रश्न ही होता है के क्या लिखूं क्या न लिखूं
इस पर तो यही कहूँगा
कवि को सच लिखना चाहिए
सिर्फ़ सच वही उसकी कविताइ है वही उसका पांडीत्य
सादर

Comment by coontee mukerji on April 11, 2013 at 12:11am

समझदार वही जो वाणी वश में करके कूछ कहे .मैं लक्ष्मण जी की बातों का समर्थन करती हूँ . धन्यवाद

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 10, 2013 at 3:52pm

मन में आया लिख दिया,  विरोध अब संभाल,

सोच समझकर  लिख दिया,उन्नत होवे भाल |-लक्ष्मण 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: जैसे जैसे ही ग़ज़ल रुदाद ए कहानी पड़ेगी
"सहृदय शुक्रिया आदरणीय ब्रज जी हौसला अफ़ज़ाई के लिये दिल से आभार सादर"
2 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 130वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है| इस बार का मिसरा…See More
3 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी
"आदरणीय अमीर जी एक मिसरा कोई22  भटकाता222  है1 सफ़र12  याँ2  पूछो22 …"
3 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-मेरी  उदासी  मुझे अकेला  न छोड़  देना
"ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त के लिए बहुत बहुत शुक्रिया भी तमाम जी..."
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बढ़िया कहा भाई मनोज जी...बधाई कुबूल करें..."
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: जैसे जैसे ही ग़ज़ल रुदाद ए कहानी पड़ेगी
"अच्छी लगीं आपकी कोशिशें भाई तमाम जी...बाकी इस्लाह तो गुणीजन ही कर सकते हैं।"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"क्या कहने वाह बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय...हरिक शे'र लाजबाब"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने कहीं पे लौट आ बचपन क्या लिख दिया-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय..."
4 hours ago
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी

22 22 22 22 22 22 22 22इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगीना दिल से सियाही निकलेगी ना सांस…See More
16 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी
"सादर प्रणाम आदरणीय अमीर जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई व मार्गदर्शन के लिये जी जनाब ये मिसरे बहर…"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी
"जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, ख़ूबसूरत अहसासात से लबरेज़ अच्छा नग़्मा पेश करने की कोशिश है, मुबारकबाद…"
19 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
"गीत एक मात्रिक छन्द है, और हर गीत का अपना विधान होता है, जो प्रदत अथवा रचयिता द्वारा चुने हुए विषय…"
19 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service