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हम मिलें या ना मिलें

हम मिलें या ना मिलेंं, चाहे फूल ना खिलें 

लेकिन इन हवाओं में, हमारा वजूद होना चाहिए 

हम चलें जिस राह में, मंज़िलों की चाह में 

गर मिल सके ना कारवाँ से 

राहपर अपने मगर, निशान होने चाहिए 

    

हम रहें या ना रहेंं, अश्क बनकर ना बहें 

चाहे बदनामी सही पर, अपना नाम होना चाहिए 

हम जलें या न जलेंं, रोशनी में ना मिले 

लेकिन हर दिलों में 

अपनी दिल की, आग होनी चाइए 

 

हम कहें या ना कहें, गीत बनकर ना रहे 

शहर की हर दीवार पर, मगर अपनी आवाज होनी चाहिए 

हम लड़ें या न लड़ें, चाहे घाव ना भरे 

पर सभी के पास कलम सी 

तीखी एक औज़ार होनी चाहिए  

हम मरें या ना मरें, कोई काम पूरा ना करे 

सबके मन में पूर्णता का भाव होना चाहिए 

हम बनें या मिटें, पर राह पर रहें डटें 

इमारत जो ना बन सके 

पऋ हमें नींव की पहली ईंट होनी चाहिये

"मौलिक व अप्रकाशित"

अमन सिन्हा 

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Comment by आचार्य शीलक राम on December 29, 2022 at 8:53pm

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