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Abhishek Kumar Amber
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  • Samar kabeer
 

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Aug 14, 2016
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Abhishek Kumar Amber's blog post ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर
"खूबसूरत ग़ज़ल कही हार्दिक बधाई... आदरनीय भंडारी जी की बात ध्यान योग्य है "
Aug 13, 2016
Abhishek Kumar Amber replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-70
"रक्षाबंधन (गीत) हाथों में लेकर के थाली रखकर उसमें कुमकुम मौली। आस लगा कर आई है बहना राखी लाई है। विश्वास को अपने बना के धागा, ,बड़ी आस से तुमको बांधा। जीवन भर मेरी रक्षा करना, दो मुझको बस एक ये वादा। बहना को खुश रखे हमेशा वही तो सच्चा भाई है। बहना…"
Aug 13, 2016
सतविन्द्र कुमार राणा commented on Abhishek Kumar Amber's blog post ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर
"सुन्दरम् आदरणीय"
Aug 13, 2016
Dr Ashutosh Mishra commented on Abhishek Kumar Amber's blog post ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर
"आदरणीय अभिषेक जी इस सुंदर ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
Aug 12, 2016
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Abhishek Kumar Amber's blog post ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय ।बधाई ।"
Aug 12, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Abhishek Kumar Amber's blog post ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर
"आदरनीय अभिशेक भाई , अच्छी गज़ल हुई है , दिल से बधाइयाँ स्वीकार करें ।  इस मंच मे गज़ल के ऊपर बह लिख ने की परम्परा है , अतँ बहर लिख दिया कीजिये । मेरे खयाल से बह्र  -- 2122    1212    22 /112  है , अगर ये…"
Aug 12, 2016
Abhishek Kumar Amber commented on Abhishek Kumar Amber's blog post ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर
"Shukriya adarniya Samar Kabeer ji. Apna ashirwad bnaye rakhe"
Aug 12, 2016
Samar kabeer commented on Abhishek Kumar Amber's blog post ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर
"जनाब अभिषेक कुमार'अम्बर'साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।"
Aug 11, 2016
Abhishek Kumar Amber posted a blog post

ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर

ख़्वाब आँखों में जितने पाले थे,टूट कर के बिखर ने वाले थे।जिनको हमने था पाक दिल समझा,उन्हीं लोगों के कर्म काले थे।पेड़ होंगे जवां तो देंगे फल,सोचकर के यही तो पाले थे।सबने भर पेट खा लिया खाना,माँ की थाली में कुछ निवाले थे।आज सब चिट्ठियां जला दीं वो,जिनमे यादें तेरी सँभाले थे।हाल दिल का सुना नही पाये,मुँह पे मजबूरियों के ताले थे।मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 11, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर left a comment for Abhishek Kumar Amber
"आपका अभिनन्दन है. ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए  ग़ज़ल की कक्षा   ग़ज़ल की बातें    भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है | | | | | | | | आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ…"
Feb 21, 2016
Abhishek Kumar Amber is now a member of Open Books Online
Feb 20, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
New Delhi
Native Place
Mawana Meerut Uttar Pradesh
Profession
Poet & Writer

Abhishek Kumar Amber's Blog

ख़्वाब आँखों में जितने (ग़ज़ल)-अभिषेक कुमार अम्बर

ख़्वाब आँखों में जितने पाले थे,
टूट कर के बिखर ने वाले थे।
जिनको हमने था पाक दिल समझा,
उन्हीं लोगों के कर्म काले थे।
पेड़ होंगे जवां तो देंगे फल,
सोचकर के यही तो पाले थे।
सबने भर पेट खा लिया खाना,
माँ की थाली में कुछ निवाले थे।
आज सब चिट्ठियां जला दीं वो,
जिनमे यादें तेरी सँभाले थे।
हाल दिल का सुना नही पाये,
मुँह पे मजबूरियों के ताले थे।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 11, 2016 at 6:50pm — 7 Comments

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At 12:38am on February 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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