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जीवन गाथा - आजादी के मूक योद्धा श्री नारायण सिंह जसवाल ( भाग 1)

 

आज पाश्चात्य संस्कृति मे रच बस रहे युवाओं के लिए आजादी का मतलब सिर्फ अपनी आजादी है। वे इस बात से बिलकुल बेखबर हैं की आज यदि हम आजाद है तो उसके पीछे न जाने कितने महान लोगों की शहादत जुड़ी हुई है । कई नाम जिन्हे  हम जानते है वे नेतृत्व कर रहे थे उनही को  नाम मिल गया ,  जिनको  आज भूले भटके याद कर लिया जाता है । कुछ नाम ऐसे भी है जिनके विषय मे हम जानते तक नहीं है जो जंगे आजादी के महानायक न सही परंतु नायक अवश्य है । हमे हर उस हिंदुस्तानी की शहादत को भूलना नहीं चाहिए जिसने हमे स्वतंत्र करवाने के लिए अपने जीवन की हर खुशी को दर किनार कर केवल देश और देश वासियों के लिए सोचा । यदि वे केवल अपने लिए सोचते तो करोड़ों हाथ जो उन महानायकों के साथ जुड़े वे न जुडते । अपने सुख को छोड़ कर देशवासियों के सुखों के लिए न्योछावर हुये वे लोग आज चिलमन मे रोशनी भी नहीं पाते । आज कहाँ गई वो देश भक्ति वो देश प्रेम जिसे हम सलाम करते थे ।

 

मेरी एक सलामी ऐसे ही मूक योद्धा के नाम

 

मुझे उनके पुत्र श्री यशपाल सिंह जी से इनके विषय मे पता चला ।  उनसे हुई बातचीत के अंश :-  वे बीते दिनों को याद करके कही खो से जाते है । उनके मुंह से केवल आह निकलती है । वे कहते है –“ आजादी की लड़ाई मे किसी ने अपना बेटा खोया ,किसी ने अपना पति , भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधने के लिए राह ताकती हजारों बहनों की आँखें पथरा सी गयी परंतु उनके भाई लौट कर नहीं आए । सबसे बड़ी बात ये है राष्ट्र ने अपने वीर सपूतों को खोया । आजादी की बलिवेदी पर हजारों वीर जवान ऐसे हुये जो चुपचाप अपना धर्म निभा कर सदा के लिए हमसे दूर चले गए । उनका कहीं  कोई नाम नहीं है,यहाँ तक की यदि आप सरदार भगत सिंह जी के घर भी जाकर देखें तो पाएंगी कि इस योद्धा ने कितनी छोटी उम्र मे  देश कि खातिर जन न्योछावर कर दी लेकिन उनके घर वालों को भी पूछने वाला कोई नहीं है । भारत का स्वतन्त्रता संग्राम अपने आप मे अनेक कहानियों के साथ अनेक अनजाने चेहरों को अपने गर्भ मे छुपाए हुए है उनकी स्वतन्त्रता संग्राम मे बेशक चर्चा न हुई हो और आज की पीढ़ी उन्हे न जानती हो तो भी देश के लिए  उनके द्वारा  किए गए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता ।”

श्री नारायण सिंह जसवाल जी नाम उनके पैतृक गाँव नाहन के लिए अपरिचित नहीं है ।............................

 

क्र्मशः

 

अप्रकाशित एवं मौलिक

 

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