For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इस बार का तरही मिसरा 'बशीर बद्र' साहब की ग़ज़ल से लिया गया है|
"ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई"
वज्न: 212 212 212 212
काफिया: ई की मात्रा
रद्दीफ़: रह गई
इतना अवश्य ध्यान रखें कि यह मिसरा पूरी ग़ज़ल में कहीं न कही ( मिसरा ए सानी या मिसरा ए ऊला में) ज़रूर आये|
मुशायरे कि शुरुवात शनिवार से की जाएगी| admin टीम से निवेदन है कि रोचकता को बनाये रखने के लिए फ़िलहाल कमेन्ट बॉक्स बंद कर दे जिसे शनिवार को ही खोला जाय|

इसी बहर का उदहारण : मोहम्मद अज़ीज़ का गाया हुआ गाना "आजकल और कुछ याद रहता नही"
या लता जी का ये गाना "मिल गए मिल गए आज मेरे सनम"

विशेष : जो फ़नकार किसी कारण लाइव तरही मुशायरा-2 में शिरकत नही कर पाए हैं
उनसे अनुरोध है कि वह अपना बहूमुल्य समय निकाल लाइव तरही मुशायरे-3 की रौनक बढाएं|

Views: 9792

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

आभार !
अच्छी रचना है.

अक्स सारे-के-सारे कहीं खो गये
धूल बस आइनों पर जमी रह गई

में 'बस' की जगह 'ही' मुझे ज्यादा मौजू लगा. विचार कीजिये.
deepak ji badhiya ghazal kahi aapne bhi.
मन-मुताबिक खिलौने कहाँ मिल सके
सबके हिस्से यहाँ बेबसी रह गई

आ गये घर के अंदर अँधेरे सनम
रौशनी आज बाहर खड़ी रह गई
अक्स सारे-के-सारे कहीं खो गये
धूल बस आइनों पर जमी रह गई

मन-मुताबिक खिलौने कहाँ मिल सके
सबके हिस्से यहाँ बेबसी रह गई bahut umda sher dil ko chhu kar guzrtee hui gzal
कुछ नए शेर पेश कर रहा हूँ....

क्या कहूँ किस कदर नकचढ़ी रह गई
ज़िंदगी कुछ बुरी कुछ भली रह गई

उम्र भर नींद आई नहीं ढंग से
आँख लेकिन लगी तो लगी रह गई

सोचता हूँ हमेशा यही शाम को
ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई
बहुत अच्छे
फिर से गिरह का शेर कमाल का है|
बहुत अच्छे शे'र कहे हैं. .
मेरी बधाई स्वीकारो दीपक..
पहले के सारे बंद अपनी जगह.. उपरोक्त तीन बंदों ने तो कमाल ही ढा दिया है. विशेषकर -
>>उम्र भर नींद आई नहीं ढंग से
आँख लेकिन लगी तो लगी रह गई
क्या कहूँ कितना प्रौढ़ लगा है ये बंद. विश्वास करता हूँ भाई, कि आपको गुमान है कि क्या लिख गये हो.

>>सोचता हूँ हमेशा यही शाम को
ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई
हर शाम .. यही सोच.. वाह! ..सारी सफलताएँ एक ओर.. बेमानी सी ही हैं.. ग़र तुम नहीं जाने तो पाया ही क्या.. वाह!
मन-मुताबिक खिलौने कहाँ मिल सके
सबके हिस्से यहाँ बेबसी रह गई,
सभी के सभी शे'र उम्द्दा और मस्त, वाह वाह के शिवा और क्या कह सकते है , बहुत बढ़िया,
ji, sukriya!
पाके भी का़यनात नज़रे नमी रह गई
ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गई

यॅू तो आबाद जहां है मेरा लेकिन-2
सेहरा बनके दिल की जमीं रह गई

हर एक अश़्क फरमान मेरे दिल का-2
मायूषियों में दबी हंसी रह गई

अपने लाश को ढ़ोये जाता हॅू मैं-2
बग़ैर तेरे फ़कत बेबसी रह गई

ऐसा लगे देख के आईना ‘‘शरद‘‘-2
जिस्म कहीं और रूह कहीं रह गई

सुबोध कुमार ‘‘शरद‘‘
तू मिला ही था बरसों मे,निगाह जमी रह गयी,
फ़साना महफिले आम हुआ ,जो आँख मे नमी रह गयी,
तेरी निगाह उकसाती रही, तेरी जुस्तजू बुलाती रही,
हुआ न बयां राज -ऐ- दिल ,बेजुबानी खलती रह गयी,
ऐ मेरे कातिल,मै टुकडो में अब भी जिन्दा हूँ,
रूह छोड़ चुकी मेरा जिस्म,बस साँस चलती रह गयी,

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
23 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
2 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
8 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
8 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service