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कई दिनों पहले अखबार में एक खबर आई - पोलीथिन पैक का उपयोग करने वालो के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान ,
आम लोगो कि तरह मैंने भी पढ़ी ,आम लोग जो रोज सिर्फ इसलिए अखबार पढ़ते है कि उन्हें नियमो का भान हो सके मगर मानना न मानना हम mango people के हाथ में रहता है , खैर बात कुछ दिनों पहले कि है , बेटे को स्कूल से लाते समय रास्ते में सब्जी कि दुकान दिखाई दी , याद आया सब्जी नहीं है लेती चलू , 4-5 तरह कि सब्जियों तुलवाने के बाद लेजाने कि समस्या थी , सब्जी वाले से मेरी परेशानी देखी नहीं गयी ,तुरंत 5 पोलीथिन पैक बना कर हाथ में दे दी , तभी दोआम से दिखने वाले युवक अपनी मोटर साइकिल लेकर आये ,धनिया माँगा ,सब्जी वाले ने उसी तरह तोल कर धनिया पोलीथिन में दे दिया ,युवको ने तुरंत विरोध किया
पोलिथन दूकान दार को पकडाई हाथ में ही धनिया लिया और रवाना हो गए पता चला ये poor mango people नहीं है , जाने क्या महसूस हुआ, कुछ सब्जियों को बेटे के स्कूल बैग में तो कुछ गाडी कि डिक्की में खाली किया , पोलीथिन दूकान दार को देकर वहा से रवाना हुई , गाडी चलाते समय ठंडी हवा के झोंके जैसे बधाई दे रहे थे "आज आम से कुछ खास बन जाने की.

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Comment by Tilak Raj Kapoor on March 19, 2011 at 6:45pm

मनुष्‍य की सहज प्रवृति सुविधा की होती है। अगर जाने वाली सुविधा का विकल्‍प उससे कुछ अच्‍छे स्‍वरूप में मिल जाये तो इस प्रकार के बदलाव सार्थक हो जाते हैं। यह सोचने का विषय है कि ऐसा क्‍या किया जा सकता है कि पॉलीथीन को लेकर सहज स्थिति ऐसी बने कि यह पूरी तरह उपयोग से बाहर हो सके।

Comment by रवि बेक on February 19, 2011 at 8:23pm
आप वास्तव मेँ खास है क्योँकि आप के जैसे अपने आप को बदले ऐसे बहुत कम होते।
प्रेरणादायक लेख बधाई हो आप को

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