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हवा के रुख को जो मोड़े वही बादल घनेरा था 
जगह बारिश की जो बदले वही झोंका हवा का था 
बदल मैं क्यूँ नहीं पाया मोहब्ब्बत इश्क की राहें 
तुम्हे मुझसे रही उल्फत, मगर मुझे इश्क तुमसे था 
-----------------------------------------------------------
अगर मुझको मोहब्बत थी, तुम्हे फिर इश्क हमसे था
अधर में रह गया क्यूँ फिर मोहब्बत का मेरा किस्सा 
लिखावट उस विधाता की , बदल फिर कौन पाया है , 
तुझे मेरी राह तकनी थी , मुझे उस राह जाना था 
_______________________________________
तुम्हे मुझसे मोह्ब्बत है यही स्वीकार कर लेते 
नदी में डूब लेते तुम या नदिया पार फिर होते 
उत्तर होके भी तुम क्यूँ सदा फिर प्रश्न करते हो 
मांझी थे हमी फिर क्यूँ भला नैया डुबो लेते

Ashish Srivastava( Sagar Sandhya )

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