For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

युगो युगो से जल रहा है रावण
मगर रावण आज तक मरा नही
जलते दिखाया रावण गत साल बाबा ने
मगर रावण अभी मरा नहीं
लूट रहा सरे राह सीता कि इज्‍जत
घूम रहा खुले आम है
मगर ,राम का अभी पता नहीं
युगो से जल रहा रावण
मगर आज तक रावण मरा नहीं
चला रहा तीर की जगह गोलीया अब वह ...
निर्दोश की जान लेने केा
औरतो केा बेवा बच्‍चों केा अनाथ कर रहा है
मगर ,राम का अभी पता नहीं
युगो से जल रहा रावण
मगर आज तक रावण मरा नहीं
जला रहा है खशीयों के संसार केा
प्‍यार से बनाये आशीयाने को
झोके दिया है अपने स्‍वार्थ वह
दर्द,भूख और गरीबी की आग में
युगो से जल रहा रावण
मगर आज तक रावण मरा नहीं
मिटा दिया था एक सीता के लिये
राम ने उस रावण की हस्‍ती केा
कैसे मिटेगा यह आज का रावण
सोच कर खुद राम परेशान है
युगो से जल रहा रावण
मगर आज तक रावण मरा नहीं
अखंड के शक्‍ल में ही जिन्‍दा है रावण
लूट खटोस हत्‍या इज्‍जत का खेलवाड
यही है आज के रावण की मंशा यारो
कैसे मनाये खुशीया हम सब
क्‍योंकि युगो से जल रहा रावण
मगर रावण आज तक मरा नहीं
रावण तो रावण के वेश में था मगर आज तेा
रावण भी घुम रहा राम के वेश में है
युगो से जल रहा रावण
मगर आज तक रावण मरा नहीं...............

.

मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 680

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Akhand Gahmari on October 25, 2013 at 1:38pm

आप सब केा हमारा हौसला बढाने के लिये कोटि कोटि प्रणाम आप सब के आदेश का हम पालन करेगें चुकि इसके बाद ही हमने एक कविता और पोस्‍ट कर दिया है प्रकाश मान मगर उसके बाद किसी कविता में हमारा प्रयास हेागा कि शाब्दिक दोष ना मिले आपका अनुज अखंड गहमरी

Comment by विजय मिश्र on October 25, 2013 at 12:38pm
विषय ज्वलन्त , सचमुच हर साल प्रतीक रूप रावण को हम जलाते हैं मगर रावण रूप अत्याचार ,व्यभिचार ,कुकर्म मर क्या ? उत्तरोत्तर बढ़ता ही जा रहा है . बहुत सुंदर रचना . बधाई अखण्डजी .
Comment by Sushil.Joshi on October 25, 2013 at 4:47am

आपने आज के एक कटु सत्य को उजागर किया है इस रचना में आ0 अखंड प्रताप जी... सचमुच इस रावण का मरना आवश्यक है जिसका आपने बयान किया है..... बधाई हो इस प्रस्तुति के लिए........... एक निवेदन है कि यदि रचना पोस्ट करने से पहले एक बार जाँच कर टंकण त्रुटियों को ठीक कर दें तो अति कृपा होगी...... एक आध गलती कभी कभी हो जाती है लेकिन अधिक गल्तियो से दिल आहत होता है..... सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 24, 2013 at 5:51pm

आदरणीय , बहुत अच्छी बात कही है , सच है न रावण अब तक मरा है !!! सबके अन्दर थोड़ा थोड़ा रावण ज़िन्दा है !!!!! आदरणीय सौरभ भाई की सलाह पर ज़रूर गौर करें !!!!! आपको रचना के लिये बधाई !!!

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 24, 2013 at 5:12pm

आदरणीय आपकी रचना ओ बी ओ पर पहली बार पढ़ रहा हूँ इस साहित्यिक परिवार में आपका स्वागत है, विषय एवं प्रयास दोनों ही बहुत अच्छा है, शिल्प, कसावट एवं कंटक त्रुटियों पर ध्यान दें. प्रयास हेतु बधाई स्वीकारें.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 24, 2013 at 4:49pm

आदरणीय वो रावन तो एक प्रतीक है  जब तक अंतस जागृत नहीं होगा तब तक कुछ नहीं होगा ..इस रचना पर मेरी तरफ से बधाई  स्वीकारें 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 24, 2013 at 1:48pm

कोशिश अच्छी है भाईजी.  शब्दों की अक्षरियों के प्रति तनिक संवेदनशील रहें.

शुभच्छाएँ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
2 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
14 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service