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महाबुद्ध से शिष्य ने पूछा, “भगवन! समाज में असत्य का रोग फैलता ही जा रहा है। अब तो इसने बच्चों को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। आप सत्य की दवा से इसे ठीक क्यों नहीं कर देते?”

महाबुद्ध ने शिष्य को एक गोली दी और कहा, “शीघ्र एवं सम्पूर्ण असर के लिये इसे चबा-चबाकर खाओ, महाबुद्धि।”

महाबुद्धि ने गोली अपने मुँह में रखी और चबाने लगा। कुछ ही क्षण बाद उसे जोर की उबकाई आई और वो उल्टी करने लगा। गोली के साथ साथ उसका खाया पिया भी बाहर आ गया। वो बोला, “प्रभो ये गोली तो नीम से भी लाख गुना कड़वी थी। ये कैसी ठिठोली थी प्रभो।”

महाबुद्ध बोले, “सच भी ऐसा ही है। यदि मैं समाज को सब कुछ सच सच बता भी दूँ तो वो उस पर कभी विश्वास नहीं करेगा और जो थोड़ा बहुत सच वो जानता और मानता है उस पर से भी उसका विश्वास उठ जायेगा।”

“तो असत्य का ये रोग समाज से कैसे मिटेगा प्रभो।”

“हमें झूठ के खोल में लपेटकर सच समाज तक पहुँचाना होगा। ताकि उसका कड़वापन खत्म हो जाय।”

“कैसे भगवन?”

“कथा लिखो महाबुद्धि। कथा लिखो।”   

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(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 10, 2017 at 2:20pm

बहुत बहुत शुक्रिया नीता जी

Comment by Nita Kasar on February 9, 2017 at 4:10pm
कथा के जरिये तीखा व्यंग्य किया है आपने बधाई आद०धर्मंद्र कुमार सिंह जी ।
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 9, 2017 at 9:30am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय आशुतोष मिश्र जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 9, 2017 at 9:29am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 9, 2017 at 9:29am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय मिथिलेश जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 9, 2017 at 9:29am

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सौरभ जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 9, 2017 at 9:28am

बहुत बहुत शुक्रिया मोहम्मद आरिफ जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 9, 2017 at 9:28am

बहुत बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहब

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 9, 2017 at 9:27am

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विजय शंकर जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 7, 2017 at 4:42pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी कमाल की लघु कथा सार्थक सन्देश समाहित किये इस शानदार रचना के लिए ढेर सारी शुभकामनायें सादर 

कृपया ध्यान दे...

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