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व्यंग्य - टेक्नालॉजी का फसाना

सबसे पहले आपको बता दूं कि औरों की तरह मैं भी तकनीक की टेढ़ी नजर से दूर नहीं हूं। तकनीक के फायदे कई हैं तो नुकसान तथा फजीहत भी मुफ्त में मिलती हैं। वैसे मेरे पास न तो विरासत में मिली संपत्ति है और न ही मैंने इतनी अकूत संपत्ति जुटाई है, जिससे जिंदगी बड़े आराम से गुजरे। मेरा तो ऐसा हाल है, जैसे बिना सिर खपाए कुछ बनता ही नहीं, मगर पिछले दिनों से इस बात को लेकर चिंतित हूं कि मैं रातों-रात लखपति क्या, करोड़पति से अरबपति बनते जा रहा हूं। दरअसल, मैंने सोचा कि जब बड़े शहरों में तकनीक की खुमारी छाई हुई है तो क्यों न, मैं भी बहती गंगा में डूबकी लगा लूं। सो, मैंने अपनी एक ई-मेल आईडी बना ली। जब से मेरी ई-मेल आईडी बनी है, उसके बाद तो जैसे मेरे सामने धन कमाने का द्वार खुल गया है तथा कुबेर देव साक्षात् आ गए हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब मैं लखपति व करोड़पति नहीं बनता। हर समय कोई न कोई जैकपॉट मुझे मिला ही रहता है। ऐसा लगता है, जैसे भाग्य मेरे सिर पर आकर टिक गया है।
मैं भी गदगद हूं कि चलो तकनीक से जुड़ने का कुछ तो फायदा मिल रहा है। ठीक है, मेरे मन में अकूत धन जुटाने की ललक है, मगर मुझे यह भी मालूम है कि जब तक मैं कहीं किसी योजना में हाथ साफ नहीं करूंगा, किसी उंचे पद पर काबिज नहीं होउंगा, सत्ता की धन जुटाउ चाबी का लाभ नहीं उठाउंगा, तब तक नहीं लगता कि मैं फूटी कौड़ी जुटा सकता हूं ? अमीर बनने का सपना तो हर पल मन में समाया रहता है और मैं अपनी ओर से दो-चार पैसे जोड़कर अपनी ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश भी करता हूं। हां, इतना जरूर लगता है कि अब मेरे भाग्य का बंद कपाट खुल गया है, क्योंकि इन दिनों रोज ही लखपति से करोड़पति बनने का सुनहरा मौका जो मिल रहा है।
एक बात बता दूं, मेरे पास कोई अथाह संपत्ति नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि ई-मेल आईडी बनाने तथा तकनीक से जुड़ने का मुझे भरपूर फायदा मिल रहा है। मुझे एक बात समझ में आती है कि यदि मैं जीवन भर पाई-पाई भी जोड़ूं तो भी कभी करोड़पति बनने का नहीं सोच सकता ? मगर अब मुझे अपनी मानसिकता बदलनी पड़ रही है, क्योंकि मैं जैसे ही अपना मेल खोलता हूं तो मेरे चेहरे खिल जाते हैं। मन अमीरी दुनिया में गोता लगाने लगता है, पल भर में दुनिया की मनचाही सुविधा हाथ में नजर आती है। यह स्वाभाविक भी लगता है कि जब किसी को जैकपॉट लगेगा तो वह उछलेगा, नाचेगा जरूर ? मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही हो गई है। मेल पर ईनामी जानकारी मिलते ही मेरा अनमना मन आनंद से भर जाता है। जब कोई दो रूपये भी ईनाम में जीतता है या फिर कोई चीज, किसी सामान के साथ गिफ्ट में मिलता है। इस समय ऐसा लगता है, जैसे सारे जहां की संपत्ति हाथ आ गई है ? यह बात सोचकर हैरत में पड़ने से परे नहीं रह पाता कि मैं हर दिन करोड़ों का कृपा पात्र बनता हूं ? और तकनीक के फसाने का पूरा लुत्फ उठाने की कोशिश कर रहा हूं, किन्तु कुछ हाथ आए तो मजा आए ?
फिलहाल मैं देखते ही देखते करोड़पति तो बन गया हूं, किन्तु जेब में कंगाली छाई हुई है। तकनीक से जुड़कर अमीर बनने के सपने ऐसे पूरे होते हैं, यह जानकर मैं सोच रहा हूं कि इंटरनेट पर ऐसा कौन महान दानदाता बैठा है, जो समाज सेवा कर रहा है ? इनके सामने तो बफेट व बिल गेट्स जैसे व्यक्ति भी फेल खाते नजर आ रहे हैं ? मुझे इस बात से संतुष्टि है कि नोटों की गड्डी बटोरने के मेरे सपने, किसी तरह पूरे होते दिख रहे हैं, लेकिन मुझे यह भी सोचकर जलन होने लगी कि मुझ जैसे अन्य लोगों पर भी तकनीक पूरी तरह मेहरबान है और वे भी हर दिन लखपति-करोड़पति बन रहे हैं। कहीं आप भी इस कतार में तो नहीं है ? यदि हैं तो संभल जाइए...
 
राजकुमार साहू
लेखक व्यंग्य लिखते हैं

जांजगीर, छत्तीसगढ़
मोबा - 098934-94714
        

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