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मरना भी हो देश पे मरना। "अज्ञात "

राम कृष्ण की जन्मभूमि,                       

है कर्म-स्थली वीरों की,                           

भारत की पावन माटी सी,                      

होगी कहीं जमीन कहाँ ।      

                 
यूँ  तो रंग अनेकों होंगे,                            

दुनिया में सब देशों के,                                            

मगर तिरंगे के रंग जैसा,                      

होगा भी रंग तीन कहाँ।

                     
शिरोधार्य कर माँ की इच्छा,                   

महलों को जिसने त्यागा,                  

रामचन्द्र सा आज्ञाकारी,                          

होगा धरमधुरीन कहाँ।

               
मरना भी हो देश पे मरना,                     

मरने से भी डरना क्या,                   

सरहद पर मरने से ज्यादा,                    

होगी मौत हसीन कहाँ।

 अजय शर्मा " अज्ञात "

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Ajay Kumar Sharma on December 7, 2015 at 6:14pm
आप सभी महानुभावों का उत्साहवर्धन के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
Comment by Shyam Narain Verma on December 7, 2015 at 4:30pm
लाजवाब रचना है बहुत बहुत बधाई आपको
Comment by जयनित कुमार मेहता on December 7, 2015 at 2:46pm
वाह!देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत रचना।

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