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उंगलियाँ सब पर उठातें रहें है हम............

उंगलियाँ सब पर उठातें रहें है हम,
आईनों से चेहरा छिपातें रहें है हम,

भ्रष्टाचार को हमनें जरुरत बना लिया,
मुल्क को अपनें ड़ुबातें रहें है हम,

रोंशनी से तिलमिलाती है आंखें हमारी,
बेईमानी से नज़रें मिलातें रहें है हम,

सियासत के बकरों का पेट नही भरता,
देश को चारे में खिलातें रहे है हम,

कितने ही बच्चें सोतें हैं यहाँ भूखें,
और सांपों को दुध पिलातें रहें हैं हम,

'अन्ना जी' का बहुत बहुत शुक्रियां,
वर्ना तो धोखा ही खातें रहें हैं हम,

'अमि' कुछ कर लो अभी वक्त हैं,
सोने की चिड़ियां जलाते रहें हैं हम,

-अमि'अज़ीम'

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Comment by राज लाली बटाला on August 1, 2011 at 2:15am

उंगलियाँ सब पर उठातें रहें है हम,
आईनों से चेहरा छिपातें रहें है हम, !! wah kya baat hai !! khoob!

Comment by अमि तेष on April 21, 2011 at 1:41pm
Thanks nemichand ji..
Comment by nemichandpuniyachandan on April 19, 2011 at 4:08pm
sundar rachana ke liye dhanyvaad.
Comment by अमि तेष on April 18, 2011 at 3:56pm
thanks Amar sir..
Comment by Amarjeet Yadav on April 15, 2011 at 6:59pm

bahut achha........

 

Comment by अमि तेष on April 12, 2011 at 12:12pm
jee Dhanybaad...

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 11, 2011 at 9:05pm
अमितेश जी , इसबार आपने काफिया और रदीफ़ का पालन बाखूबी किया है, एक बार फिर बधाई |
Comment by अमि तेष on April 11, 2011 at 8:07pm
Thank you Veerendra ji..
Comment by Veerendra Jain on April 11, 2011 at 12:49pm
bahut hi umda Amitesh ji....badhai aapko...
Comment by अमि तेष on April 9, 2011 at 3:29pm
Thank you Arun sir...

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