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नसरी नज़्म :- "शाईरी"

शाईरी
सिर्फ़ ग़ज़ल का नाम नहीं
इसके अनेक रूप हैं
कहीं साया कहीं धूप है
शाईरी
सुक़रात ने की,मीरा ने की
मज़दूर ने की,धनवान ने की
इसमें क़ाफ़िया लाज़िम नहीं
इसमे बह्र भी लाज़िम नहीं
आप जो ख़ूबसूरत बाते करते हैं
वो शाईरी है
शाईरी नज़ाकत का नाम है
इससे सबको काम है
शाईरी के लिये लाज़िम है अहसास
दर्द भरा दिल,जैसे बिस्मिल
सब शाईर के हैं
शाईर सबका होता है
जैसे भगवान सब का होता है
शाईरी सिर्फ़ ग़ज़ल का नाम नहीं
शाईरी
क़सीदा है,मर्सिया है
अतुकान्त कविता है
मुक्तक है,आज़ाद नज़्म है
नसरी नज़्म है
गीत है,संगीत है
दोहा है,रुबाई है
छंद है,तज़्मीन है
शाईरी को समझो
शाईर को समझो
उसके अहसास को समझो
वो सबका दर्द बयान करता है
वो अपनी शाईरी से
सबका मन मोह लेता है
शाईरी शब्दों का जाल है
जिसके पास ज़्यादा शब्द वह मालामाल है
शाईरी सिर्फ़ ग़ज़ल का नाम नहीं |

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1380

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Comment by Samar kabeer on April 23, 2015 at 10:37am
जनाब मिथिलेश वामनकर जी,आदाब,हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रिया |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 22, 2015 at 10:56pm

आपकी नज्म खूब सुन्दर हुई है विलम्ब से देख पाया. हार्दिक बधाई 

Comment by Samar kabeer on April 20, 2015 at 6:37pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी,आदाब,रचना में आपकी शिर्कत का इन्तिज़ार था, हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ|

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 20, 2015 at 3:07pm

आदरणीय समर भाई , रचना मे शायरी बहुत सुन्दरता से परिभाषित हुई है ॥ दिली मुबारक बाद  स्वीकार करें ॥

Comment by Samar kabeer on April 20, 2015 at 10:16am
जनाब "जान" गोरखपुरी साहिब ,आदाब,रचना में आपकी शिर्कत हो गई लिखना सार्थक हुवा,हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 19, 2015 at 8:16pm

लाजव़ाब!! आदरणीय मै आपकी बात से सर्वथा सहमत हूँ!

Comment by Samar kabeer on April 19, 2015 at 10:24am
जनाब श्री सुनील जी,आदाब,ऐसी रचनाओं पर लोगों की रूची कम होती है,आपको मेरी रचना से बल मिला,लिखना सार्थक हुवा,हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |
Comment by Samar kabeer on April 19, 2015 at 10:17am
जनाब डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी,आदाब, ज़र्रा नवाज़ी के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |
Comment by Samar kabeer on April 19, 2015 at 10:14am
आली जनाब डा.विजय शंकर जी,आदाब, हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रिया |
Comment by shree suneel on April 18, 2015 at 5:43pm
आदरणीय समर कबीर सर, आपकी ये ख़ूबसूरत नज़्म पढ़ कर मेरे ख़्याल को बल मिला.
/आप जो ख़ूबसूरत बाते करते हैं
वो शाईरी है
शाईरी नज़ाकत का नाम है
इससे सबको काम है...
बहुत बढि़या. बधाई

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