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कल उपार्जन केंद्र पर रामदीन को अपने नमीरहित शुष्क चमकदार गेहूं को बेचने जाना है. अचानक बे-मौसम घिर आये बादलों को देख, रामदीन अपने आँगन में पड़े अनाज को अपनी पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों की मदद से घर में भरने को जुट गया..

उधर उपार्जन केंद्र पर किसानों से ही खरीदा हजारों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा हुआ है. जिला प्रशासनिक अधिकारी ने चिंता जताते हुए समिति अध्यक्ष को फोन पर जानकारी लेते हुए पूछा..

“ उपज पर बारिश न हो, इसकी कैसी क्या व्यवस्था है..? अगर बारिश होती है तो अधिक से अधिक कितना नुक्सान दर्शा सकते है..”

 

 

   जितेन्द्र पस्टारिया

(मौलिक व् अप्रकाशित)  

 

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 4, 2015 at 12:02pm

आपका बहुत-बहुत आभार,आदरणीय राजेन्द्र जी

सादर!

Comment by RAJENDER KUMAR GAUR on April 29, 2015 at 1:09pm

DUKHAD LEKIN SATYA HALAT

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 15, 2015 at 10:58am

आपसे रचना पर प्रोत्साहन और सराहना पाकर बहुत संतोष मिलता है आदरणीय मिथिलेश जी. आपका ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 15, 2015 at 10:56am

रचना की मुक्तकंठ से सराहना हेतु आपका ह्रदय से आभार, आदरणीय कृष्णा जी.

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 15, 2015 at 10:54am

आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया, रचना को सार्थकता प्रदान करती है. आपका ह्रदय से आभारी हूँ आदरणीया राजेश दीदी

सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 14, 2015 at 7:34am
आदरणीय जितेंद्र जी कमाल कमाल कमाल
बहुत ही नज़ाकत से आपने कड़वे सच को व्यक्त किया है।
बिना नारेबाजी के सिस्टम की विसंगतियों को जोरदार तरीके से अभिव्यक्त करने में सफल लघुकथा।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 13, 2015 at 10:38pm

इस बेहतरीन और सार्थक लघुकथा की जितनी तारीफ़ की जाये कम है,ऐसे ही गूंढ मुद्दों को उठाने की जरुरत है! बहुत बहुत हार्दिक बधाईयां!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 13, 2015 at 9:09pm

यही हाल है सब जगह व्यवस्था चौपट है तथा अपने फायदे की बात पहले सोच लेते हैं देश में कितने लोग ऐसे हैं जिन्हें एक वक़्त की रोटी भी नहीं मिलती और प्रशासन के पास इतना अनाज सड़ता रहता है ...बहुत विचारणीय मर्म है लघु कथा का --दिल से बधाई जितेन्द्र भैया |

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 13, 2015 at 11:36am

आपका बहुत-बहुत आभार ,आदरणीया ज्योतिर्मय पन्त जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 13, 2015 at 11:35am

आपकी बधाई सहर्ष सिर आँखों पर, आदरणीय गिरिराज जी

सादर!

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