For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : ज़ुल्फ़ का घन घुमड़ता रहा रात भर

बह्र : २१२ २१२ २१२ २१२

 

ज़ुल्फ़ का घन घुमड़ता रहा रात भर

बिजलियों से मैं लड़ता रहा रात भर

 

घाव ठंडी हवाओं से दिनभर मिले

जिस्म तेरा चुपड़ता रहा रात भर

 

जिस्म पर तेरे हीरे चमकते रहे

मैं भी जुगनू पकड़ता रहा रात भर

 

पी लबों से, गिरा तेरे आगोश में

मुझ पे संयम बिगड़ता रहा रात भर

 

जिस भी दिन तुझसे अनबन हुई जान-ए-जाँ

आ के ख़ुद से झगड़ता रहा रात भर

---------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 805

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 12:31pm
तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आदरणीय सौरभ जी। स्नेह बना रहे। तीसरे शे’र पर आपसे सहमत हूँ। इसको और समय देने की आवश्यकता है।
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 12:26pm
बहुत बहुत शुक्रिया नज़ील साहब

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 1, 2015 at 11:57am

ज़ुल्फ़ का घन घुमड़ता रहा रात भर
बिजलियों से मैं लड़ता रहा रात भर..  .. आपके अंदाज़ का मतला हुआ है, आदरणीय

घाव ठंडी हवाओं से दिनभर मिले
जिस्म तेरा चुपड़ता रहा रात भर........... कहना ही क्या .. इस भाव को शाब्दिक करने केलिए बार-बार बधाई..

जिस्म पर तेरे हीरे चमकते रहे
मैं भी जुगनू पकड़ता रहा रात भर.......... इस शेर का मेयार बहुत बड़ा है. मेरे हिसाब से इस शेर को और समय देना उचित होगा..

पी लबों से, गिरा तेरे आगोश में
मुझ पे संयम बिगड़ता रहा रात भर......... संयम के बिगड़ने या क्रोधित होने का ज़वाब नहीं, भाईजी.. कमाल-कमाल !

जिस भी दिन तुझसे अनबन हुई जान-ए-जाँ
आ के ख़ुद से झगड़ता रहा रात भर............ वल्लाह ! इस स्वीकृति पर कौन ’तुझ’ न क़ुर्बान हो जाये !!..

आदरणीय धर्मेन्द्रभाईजी, आपकी इस ताब की ग़ज़ल ढेर दिनों बाद सामने आयी है. दिल से बधाई स्वीकारें.

Comment by Nazeel on April 1, 2015 at 11:12am

आदरणीय भाई धर्मेन्द्र जी अच्छी रचना हुई है  हार्दिक शुभकाएँ।
//ज़ुल्फ़ का घन घुमड़ता रहा रात भर
बिजलियों से मैं लड़ता रहा रात भर///     शेयर  के  लिए  एक बार   फिर से दिली दाद।

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 10:56am
बहुत बहुत शुक्रिया आ. आशुतोष जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 10:55am
बहुत बहुत शुक्रिया नीलेश जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 10:54am
ज़र्रानवाजिश का बहुत बहुत शुक्रिया आ. गिरिराज जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 10:53am
तह-द-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आ. समर साहब
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 10:53am
बहुत बहुत शुक्रिया आ. सोमेश जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 1, 2015 at 10:52am
बहुत बहुत शुक्रिया आ. दिनेश कुमार जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Mar 11
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Mar 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service