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गाँव को तहजीब में यारो नगर मत कीजिए - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

2122    2122    2122    212

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कोशिशें  पुरखों  की  यारों बेअसर मत कीजिए
नफरतों को फिर दिलों का यूँ सदर मत कीजिए

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मिट गये  ये तो  नरक  सी जिंदगी हो जाएगी
प्यार  को  सौहार्द  को यूँ दरबदर मत कीजिए

******
कर रहे हो  कत्ल  काफिर बोलकर मासूम तक
नाम  लेकर  धर्म का  ऐसा कहर  मत कीजिए

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वो  शहीदी  कैसे  जिनसे  है  फसादों   की  फसल
उनको ये इतिहास में लिख के अमर मत कीजिए

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दुश्मनी  होती  है पल में  दोस्ती  को  इक दसक
दोस्तों से  यूँ  सियासत  को  समर मत कीजिए

*******
कुछ तो अपनापन  बचा है नीम तुलसी आम में
गाँव  को  तहजीब  में  यारो  नगर मत कीजिए

*******
चाहिए  रफ्तार  लेकिन  जिंदगी  घोड़ा  नहीं
बेमियादी  दौड़  से  लय  बेबहर मत कीजिए

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मौलिक और अप्रकाशित

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:44pm

आ0 भाई खुर्शीद जी, गजल की प्रशंसा कर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:43pm

आ0 भाई गिरिराज जी, उत्साहवर्धन और कहर तथा बेबहर के वास्तविक रूपों ; कह्र , बेबह्र की ओर ध्यान दिलाने के लिए हार्दिक धन्यवाद । साथ ही मेरी इस जिज्ञासा का समाधान भी चाहता हू कि क्या वर्तमान स्वरूप में गजल के ये दोनो असआर बिलकुल स्वीकार्य नहीं है ?

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:43pm

आ0 भाई आशुतोष जी, गजल पर विस्तृत प्रतिक्रिया देकर मेरा आत्मविश्वास में वृद्धि करने का कार्य किया है उसके लिए कोटि कोटि आभार । स्नेह बनाए रखें .......

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:43pm

आ0 भाई , सोमेश जी, गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:42pm

आ0 भाई विजय शंकर जी, आपकी सकारात्मक टिप्पणिया हमेशा मेरा उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन दोनों करती हैं ..... हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:42pm

आ0 भाई मिथिलेश जी, गजल पर उपस्थिति से मान बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:42pm

आ0 राजेश बहन, आपको गजल अच्छी लगी मेरे लेखन को सार्थकता प्रदान हुई । स्नेहाशीष बनाए रखें .....

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:42pm

आ0 छाया बहन, गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:42pm

आ0 भाई राम सिरोमणि जी, गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2015 at 1:41pm

आ0 भाई सर्वेश कुमार जी, उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार ।

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