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कुछ बदला है क्या?

सचमुच,कुछ बदला है क्या?

हाँ ...

बदली हैं सरकारें, लेकर लुभावने वादे,

खाऊँगा न खाने दूंगा,

साफ़ करूंगा, साफ़ रखूंगा,

मेक इन इण्डिया

मेड इन इण्डिया

‘सायनिंग इण्डिया’ का नया संस्करण

बलात्कार इन इण्डिया(?)

कुर्सी वही, संसद वही

किरदार नए, भोंपू वही

वादे नए

बढ़ेंगे, रोजगार के अवसर

होंगे हम, आत्म निर्भर

विदेशी निवेश के भरोसे!

 

आइये, बिछाइये, ग्रीन कारपेट  

‘वे’ आनेवाले हैं, लेकर लाव लश्कर!  

 

मौलिक व अप्रकाशित 

- जवाहर लाल सिंह 

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 20, 2015 at 9:28am

उत्साहजनक प्रतिक्रिया के लिए आदरणीया अर्चना तिवारी जी का हार्दिक अभिवादन!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:46am

आदरणीय लडीवाला साहब, सादर अभिवादन! उत्साह वर्धन हेतु हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:45am

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, सादर अभिवादन!

आपने बिलकुल सही कहा है हम बिलकुल नहीं बदले हैं, अपने आस पास वैसे ही गंदगी का ढेर देखते हैं, जहाँ तहां थूकते भी हैं और नशा ? उसकी तो पूछिए मत कल पिकनिक गया था. नशा और गन्दगी का आलम जो देखा .... सब कुछ वही ...सिर्फ रोना... है महंगाई ...सरकार ,,,, हम सब हैं बेकार विभिन्न समुदायों की मंडली देखकर भी भारत के दर्शन हुए...सादर!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:40am

आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी, सादर अभिवादन!

उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया और पंक्तियाँ चिह्नित करने हेतु आभार !

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:39am

आदरणीय उमेश कटारा जी, सादर अभिवादन!

उत्साहवर्धक पर्तिक्रिया हेतु आभार !

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:38am

आदरणीया प्रतिभा त्रिपाठी जी उत्साह वर्धक और विवेचनात्मक पर्तिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार 

Comment by Archana Tripathi on January 19, 2015 at 10:38am
हम ग्रीन कार्पेट ही बिछाते रहेंगे ।कुछ बदलेगा ऐसा तो नहीं लगता।
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:36am

आदरणीय डॉ. विजय शकर साहब, सादर अभिवादन!

उत्साहवर्धक काव्यात्मक प्रतिक्रिया हेतु अत्यंत आभार !

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:34am

आदरणीय मिथिलेश साहब, सादर अभिवादन!

उत्साहवर्धक पर्तिक्रिया हेतु आभार !

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 19, 2015 at 10:33am

आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण साहब, सादर अभिवादन!

उत्साहवर्धक पर्तिक्रिया हेतु आभार !

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