For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

खार में भी कली खिला देगा ,

आदमी जब भी मुस्कुरा देगा |

 

यह तो दस्तूर है ज़माने का ,

नाम लिख कर कोई मिटा देगा |

 

खत को उठेंगे जब भी हाथ मेरे ,

मन मेरा आपका पता देगा |

 

जल रही हैं जड़ें बगावत में ,

पेड़ को अब पवन गिरा देगा |

 

इन पहाड़ों पर रोशनी न करो ,

आदमी घर यहाँ बना लेगा |

 

ये लगन मुझमे किस वजह से है ,

काम मेरा तुम्हे बता देगा |

 

खुद घिरा है वो बद्दुआओं में ,

वो यकीनन तुम्हे दुआ देगा |

 

आदमी सिर्फ एक बहाना है ,

जब भी देगा हमें खुदा देगा |

 

एक अभिनव फकीर आया है ,

बस्तियों में अलख जगा देगा |

 

(@अभिनव अरुण # १३-०२-२००४)

Views: 638

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on March 14, 2011 at 8:29am
धन्यवाद विवेक जी , आभार अश्वनी जी | आपने गज़ल पसंद की मेरा हौसला बढ़ा |
Comment by विवेक मिश्र on March 13, 2011 at 10:18pm
वाह अरुण जी... क्या बात है.. बहुत खूब.. सारे अश'आर बेहतरीन हैं. दाद कबूल करें.
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on March 13, 2011 at 5:22pm
kya baat hai arun ji
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on March 13, 2011 at 5:22pm
bastiyon mein alakh jaga dega
Comment by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 3:59pm
शुक्रिया एडमिन जी इतनी तेज़ सुनवाई के लिये ....
Comment by Admin on March 13, 2011 at 3:58pm
आदरणीय अरुण जी, "जागा देगा "को  'जगा देगा ' कर दिया गया है |
Comment by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 3:25pm
एडमिन जी "जागा देगा "को कृपया 'जगा देगा ' कर दे, आभारी रहूँगा |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
2 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
17 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service