For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

न होना दूर नज़रों से कसम हमको खिलाती थी
न दे जब साथ लब उसके इशारो से बुलाती थी

किताबों में छुपाती थी दिया हमने जो दिल उसको
बचा नज़रे सभी की वो उसे दिल से लगाती थी

चुरा नज़रे सभी की हम मिले जब बाग में इक दिन
लगा कर वो गले हमको बढ़ी धड़कन सुनाती थी

कभी आँखों मे डाले अाँख कर देता शरारत तो
चुरा कर वो नज़र हमसे जरा सा मुस्‍कुराती थी

न भूलेगे कभी हम तो बिताये साथ पल उसके
छुपा कर चाँद सा मुखड़ा हमें हरदम सताती थी

मौलिक एवं अप्रकाशित

अखंड गहमरी

Views: 792

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by शकील समर on September 10, 2014 at 3:45am

जी हां, इस बदलाव से ये गजल काफिए के स्तर पर दुरुस्त हो जाएगी।

Comment by Akhand Gahmari on September 10, 2014 at 12:26am

अादरणीय गुरूवर गिरिराज भंडारी जी आपको चरण स्‍पर्श आप सर्मथन नहीं आदेश करें।

Comment by Akhand Gahmari on September 10, 2014 at 12:25am

आदरणीय शकील समर जी आप जैसे मार्गदर्शक की वजह से आज हम सीख पाये है और सीख पा रहे है मार्गदर्शन के लिये आपको नमन जहॉं तक बदलवा की बात है मैने ये बदलाव किया है क्‍या इससे समस्‍या हल हो जायेगी

न होना दूर नज़रों से कसम हमको खिलाती थी
सजा दो मॉंग अब मेरी इशारो से बताती थी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 9, 2014 at 8:39pm

आदरणीय अखंड भाई , ग़ज़ल की बातें बहुत खूब सूरत लगीं , काफिये में गड़बड़ी है , आदरणीय शकील भाई के कहे का मैं भी समर्थन करता हूँ , सुदार लीजिये गा | प्रयास के लिए बधाइयाँ |

Comment by शकील समर on September 9, 2014 at 4:27pm

आदरणीय अखंड गमहरी साहब,
आपकी ये गजल काफिए के स्तर पर खारिज हो रही है। मतले में आपने वकाफी 'खिलाती' और 'बुलाती' लिया है। मेरी जानकारी के अनुसार इसमें इकवा दोष है। अगर क्षण भर के लिए इकवा दोष को नजरअंदाज भी कर दिया जाए तो शेष अशआर के काफिये भी खारिज हो रहे हैं। क्योंकि किसी में भी 'लाती' को नहीं निभाया गया है। सादर।

Comment by ram shiromani pathak on September 8, 2014 at 11:06am
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय अखंड भाई।। बहुत बहुत बधाई आपको।। सादर
Comment by Akhand Gahmari on September 7, 2014 at 9:33pm

हम आपके मार्गदर्शन एवं उत्‍साहवर्धन्‍ा के सदैव आकांक्षी है मेरा प्रणाम स्‍वीकार करें आदरणीय harivallabh sharma जी

Comment by Akhand Gahmari on September 7, 2014 at 9:33pm

हम आपके मार्गदर्शन एवं उत्‍साहवर्धन्‍ा के सदैव आकांक्षी है मेरा प्रणाम स्‍वीकार करें आदरणीय Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' जी

Comment by harivallabh sharma on September 7, 2014 at 9:29pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल..
किताबों में छुपाती थी दिया हमने जो दिल उसको 
बचा नज़रे सभी की वो उसे दिल से लगाती थी..सभी अशआर लाजबाब ..बधाई आपको.

Comment by Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' on September 7, 2014 at 8:39pm

बहुत सुंदर शृंगारित भाव। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
40 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
3 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
7 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
22 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service