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आओ हिन्दी पढें-पढायें हम..

मिलके हिन्दी के गीत गायें हम....

जैसा लिखते हैं वैसा उच्चारण,

इसलिये हिन्दी को करें धारण

विश्व को आओ सच बतायें हम..

मिलके हिन्दी के गीत गायें हम.....

सभ्यता लिप्त हिन्दी भाषा में

एक इतिहास जिसकी गाथा में 

अपनी गाथायें मत भुलायें हम...

आओ हिन्दी पढें-पढायें हम.....

संस्कृत रक्त में समायी है

देव भाषा वही बनायी है

अपने सम्मान को बढायें हम..

आओ हिन्दी पढें पढायें हम....

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by सूबे सिंह सुजान on September 6, 2014 at 10:00pm

 Sulabh Agnihotri,  सुलभ जी , आपका बहुत बहुत आभार

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 6, 2014 at 9:59pm

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव,  जी आपका प्रेम, मुझे, मिला बहुत  बहुत धन्यवाद ।

हम हिन्दी से प्यार करें इसका प्रचार-प्रसार करें  हिन्दी की अशुद्धियों को दूर करें व हिन्दी की विशेषताओं को जनता ,जनसाधारँ के सामने रखें।

Comment by Sulabh Agnihotri on September 6, 2014 at 5:41pm

बहुत सुन्दर है सूबे सुजान सिंह जी !
इसी अलख को जगाये रहें।

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 4, 2014 at 10:58pm

आदरणीय सूबे सिंहजी, 

हिंदी की सुंदर महिमा गाई

कम शब्दों में की है बड़ाई 

हिंदी मास में अलख जगाई

हस्ताक्षर हिंदी में हो भाई 

स्वीकार कीजिए मेरी बधाई 

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 4, 2014 at 9:41pm

 गिरिराज भंडारी,  धन्यवाद...........हिन्दी हमारी मात्र भाषा है हम हिन्दी से बहुत प्यार करते हैं।

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 4, 2014 at 9:39pm

harivallabh sharma, जी बहुत , शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2014 at 5:22pm

हिन्दी के पति आपके भाव बहुत अच्छे लगे , आदरणीय बधाइयाँ |

Comment by harivallabh sharma on September 4, 2014 at 1:29pm

अति सुन्दर रचना ..बधाई आपको.

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 3, 2014 at 10:08pm

मित्रों, मेरे विचार से अब समय आ गया है हमें हिन्दी की विशिष्टताओं को बताना चाहिये न कि सदा यही रोते रहें कि- हमने हिन्दी को दासी बनाया है। सकारात्मकता से जनता को हिन्दी की तरफ रूझान करना है । जो साहित्यकारों का ही कर्त्व्य है।

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 3, 2014 at 10:04pm

narendrasinh chauhan , बहुत आभार आदरणीय...

आपका धन्यवाद

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