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हमें वो वेवफा कह कर बुलाते है सितम देखो
चुरा कर नीद रातो की सताते है सितम देखो

कभी मै देखता भी तो नहीं था जाम के प्‍याले
कसम दे कर मुझे अपनी पिलाते है सितम देखो

बडे अरमान से जिसने  बनाया आशिया मेरा
वही उस आशिये को अब जलाते है सितम देखो

न रूठे वो कभी हमसे हमारे साथ चलते थे
मगर अब साथ गैरो का निभाते है सितम देखो

खुले जो लब कभी जिनके हमारा नाम ही निकले
न जाने क्‍यो वही हमको भुलाते है सितम देखो

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 5:55pm

इस कोशिश में एक गहराई है. सतत अभ्यास करते रहें भाईजी.

बहुत-बहुत बधाई

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 8:12pm

उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय निलेश शवारकर जी  आप के मार्गदर्शन अनुसार गजल के मूल प्रति में  संसोधन किया दिया है त...

Comment by Priyanka singh on July 2, 2014 at 5:09pm

वाह बहुत खूब ....अच्छी ग़ज़ल ... बधाई आपको ...

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 3:48pm

उत्‍साहवर्धन  पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय गिरिराज भंडारी जी

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 3:48pm

उत्‍साहवर्धन  पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi"जी

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 3:47pm

उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय  जितेन्‍द्र गीत जी

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 3:46pm

उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय  नीरज ब्रजेश जी 

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 3:45pm

उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय  शिज्जु शकूर  जी

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 3:45pm

उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय डा गोपाल नारायण श्रीवास्‍तव जी

Comment by Akhand Gahmari on July 2, 2014 at 3:44pm

उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन पर नमन स्‍वीकार करें आदरणीय  laxman dhami आप के मार्गदर्शन अनुसार संसोधन किया दिया हमने पुन: नमन

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