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ग़ज़ल -कि साज़िश के निशाने पर ही हमने दिन गुजारे हैं

 १२२२      १२२२     १२२२       १२२२

हमें माझी की आदत है उसी के ही सहारे हैं

डुबो दे बीच में चाहे, वो चाहे तो किनारे हैं

मिटाने को हमें अब जा मिला घड़ियाल से माझी

कि साज़िश के निशाने पर ही हमने दिन गुजारे हैं

चमकती चीज ही मिलती रही सौगात में हमको

समझ बैठे ये धोखे से कि किस्मत में सितारे हैं

सियासत जो हमारे घर में ही होने लगी है अब

तभी हर बात में कहने लगे वो  हम तुम्हारे हैं

अदावत घर में ही होने लगे तो क्या करें साहिब

बताएं क्या कि हर सूरत हमी अपनों से हारे हैं

संजू शब्दिता  मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by sanju shabdita on July 7, 2014 at 6:48pm

आदरणीय सौरभ सर मेरी यह कोशिस आपको बहुत अच्छी लगी ... इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 12:07am

एक बहुत अच्छी कोशिश के लिए दिल से दाद संजूजी.

सियासत जो हमारे घर में ही होने लगी है अब

तभी हर बात में कहने लगे वो  हम तुम्हारे हैं.............  इस शेर पर विशेष दाद दे रहा हूँ..

Comment by sanju shabdita on June 29, 2014 at 9:52am

आ0 प्राची दी बहुत बहुत शुक्रिया आपका

Comment by sanju shabdita on June 29, 2014 at 9:52am

आदरणीय जितेंद्र गीत जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका

Comment by sanju shabdita on June 29, 2014 at 9:51am

आदरणीय उमेश जी आपका हार्दिक आभार

Comment by sanju shabdita on June 29, 2014 at 9:51am

आदरणीय गिरिराज जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 26, 2014 at 3:38pm

दिल को छू लेने वाले अशआर कहे हैं प्रिय संजू शब्दिता जी 

चमकती चीज ही मिलती रही सौगात में हमको

समझ बैठे ये धोखे से कि किस्मत में सितारे हैं

अदावत घर में ही होने लगे तो क्या करें साहिब

बताएं क्या कि हर सूरत हमी अपनों से हारे हैं

ये दो शेर ख़ास पसंद आये 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 22, 2014 at 10:16am

मिटाने को हमें अब जा मिला घड़ियाल से माझी

कि साज़िश के निशाने पर ही हमने दिन गुजारे हैं............बहुत खूब, आजकल यही सब कुछ पा रहा है अपनों से इंसान

बहुत लाजवाब गजल कही आपने आदरणीया संजू जी, हार्दिक बधाई आपको

Comment by umesh katara on June 21, 2014 at 5:41pm

आदरणीया सुन्दर गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 21, 2014 at 11:26am

आदरणीया संजू जी , खूब सूरत ग़ज़ल हुई है , आपको ढेरों बधाइयाँ ।

मिटाने को हमें अब जा मिला घड़ियाल से माझी

कि साज़िश के निशाने पर ही हमने दिन गुजारे हैं ------ बहुत खूब , आदरणीया , बधाई ॥

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