For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122   1122   1122   22

दिल में उम्मीद तो होटों पे दुआ रखता हूँ

तुम चले आना मैं दरवाज़ा खुला रखता हूँ

 

ये तेरा हुस्न अगर जलता शरारा है तो क्या  

मैं भी जज़्बात की जोशीली हवा रखता हूँ

 

राहे-उल्फ़त में तू अपने को अकेला न समझ

दिल में चाहत का दिया मैं भी सदा रखता हूँ

 

ख़ुशनुमा मंज़रो - तस्वीर न गुल बूटे से 

अपने कमरे को दुआओं से सजा रखता हूँ

 

अपनी औक़ात कहीं भूल न जाऊँ ‘साहिल’

इसलिए महल में मिट्टी का घड़ा रखता हूँ

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 284

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 16, 2014 at 10:09pm

अपनी औक़ात कहीं भूल न जाऊँ ‘साहिल’

इसलिए महल में मिट्टी का घड़ा रखता हूँ................बहुत खूबसूरत ख़याल 

हार्दिक बधाई 

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 16, 2014 at 5:49pm

 .वाह! बहुत सुंदर. गजल आदरणीय शुशील जी,

Comment by MAHIMA SHREE on June 15, 2014 at 4:06pm

बढ़िया .. क्या बात है दिली  दाद प्रेषित है सादर

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 14, 2014 at 10:37am

दिल में उम्मीद तो होटों पे दुआ रखता हूँ

तुम चले आना मैं दरवाज़ा खुला रखता हूँ.............वाह! बहुत सुंदर. बहुत कुछ कह देता हुआ मतला

 

ये तेरा हुस्न अगर जलता शरारा है तो क्या  

मैं भी जज़्बात की जोशीली हवा रखता हूँ.................क्या बात कही है .

 

बेहतरीन गजल आदरणीय शुशील जी, दिली बधाई स्वीकारिये

Comment by Meena Pathak on June 12, 2014 at 11:55pm

शानदार गज़ल हेतु बधाई स्वीकारें आदरणीय 

Comment by annapurna bajpai on June 12, 2014 at 7:40pm

सुंदर गजल हेतु बधाई आपको आ0 सुशील जी । 

Comment by umesh katara on June 12, 2014 at 7:28pm

shandaaar ghazal सुशील जी बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 12, 2014 at 6:33pm

अपनी औक़ात कहीं भूल न जाऊँ ‘साहिल’

इसलिए महल में मिट्टी का घड़ा रखता हूँ ----- लाजवाब ! बहुत बधाइयाँ , सुन्दर ग़ज़ल कही भाई सुशील जी ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-76
""ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-76 में आप सभी का स्वागत है...."
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
""ओबीओ लाइव तरही मुशाइर:"- अंक-133 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों का हार्दिक आभार व…"
8 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय नाहक जी बहुत बहुत शुक्रियः।हौसला बढ़ाने हेतु।"
9 hours ago
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post सावन के दोहे : ..........
"पुनश्च, विषम पुनश्च,विषम, नहीं, तृतीय दोहे का चतुर्थ ( सम) चरण पढ़े ं! अब जो पोस्ट, सावन के दोहे...…"
10 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"अब ठीक है ।"
10 hours ago
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post सावन के दोहे : ..........
"नमस्कार, आदरणीय सुशील सरना जी! अच्छा नहीं लगा कि आपने मेरे प्रथम सुझावों पर मनन तो किया और तदनुसार…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई सौरभ जी, सादर आभार.."
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई समर जी, पुनः मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ. भाई समर जी, हार्दिक धन्यवाद।"
10 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आ गए बस दे के अपनी जान का नज़राना हम वो थे गोया शम'अ कोई और ज्यूँ परवान: हम तोड़ देते उससे…"
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
10 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
11 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service