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तुम मेरी सम्पूर्णता की बानगी हो (ग़ज़ल 'राज')

2122  2122   2122 

तुम ग़ज़ल मेरी मुहब्बत में पगी हो

फूल, कलियाँ,वल्लरी सी ताज़गी हो

 

तुमको पाकर ये मकाँ घर हो गया है

तुम मेरी सम्पूर्णता की बानगी हो

 

इन तेरी साँसों से महके प्रेम उपवन

रूप यौवन में बसी इक सादगी हो

 

पास आकर भी नहीं तुम पास मेरे

दूरियों से क्यूँ न फिर नाराज़गी हो

 

बिन तेरे ये दिल धड़कना छोड़ देता   

आज कहता हूँ मेरी तुम जिंदगी हो

 

प्यार पाकर दिल नहीं भरता ये मेरा

झील होकर अनबुझी इक तिश्नगी हो

 

दिल बिछा दूँ मैं जहाँ तू पाँव रख दे

इससे बढ़कर क्या मेरी दीवानगी हो

 

 (मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by rajesh kumari on May 27, 2014 at 9:29pm

चन्द्र शेखर पाण्डेय जी बहुत- बहुत शुक्रिया .

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on May 27, 2014 at 2:15pm

बहुत खूब


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 27, 2014 at 1:55pm

आ० डॉ आशुतोष जी आपको ग़ज़ल पसंद आई ...बहुत ख़ुशी हुई...  पाठक की प्रशंसा ही पारितोषिक के सामान है तहे दिल से शुक्रिया .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 27, 2014 at 1:53pm

मेरी इस ग़ज़ल को फीचर करने के लिए दिल की गहराइयों से शुक्रिया आ० एडमिन जी 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 27, 2014 at 1:48pm

आदरणीया राजेश जी ...इस ग़ज़ल की जितनी तारीफ की जाए कम है ..हर शेर शानदार है 

तुमको पाकर ये मकाँ घर हो गया है

तुम मेरी सम्पूर्णता की बानगी हो...मकान घर बन जाए कितना सुखद है 

प्यार पाकर दिल नहीं भरता ये मेरा

झील होकर अनबुझी इक तिश्नगी हो...वाह क्या बात है 

इस शानदार ग़ज़ल पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई ..सादर

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 18, 2014 at 12:26pm

आशीष नैठानी  जी , आपको ग़ज़ल पसंद आई ,तहे दिल से आभार आपका |मेरा लिखना सार्थक हुआ. इस उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 18, 2014 at 12:25pm

प्रिय अरुनशर्मा  जी , आपको ग़ज़ल पसंद आई ,तहे दिल से आभार आपका |मेरा लिखना सार्थक हुआ. इस उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 18, 2014 at 12:23pm

आ0 गिरिराज भंडारी जी , आपको ग़ज़ल पसंद आई ,तहे दिल से आभार आपका |मेरा लिखना सार्थक हुआ. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 18, 2014 at 12:22pm

प्रिय राम शिरोमणि पाठक जी , आपको ग़ज़ल पसंद आई ,तहे दिल से आभार आपका |मेरा लिखना सार्थक हुआ. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 18, 2014 at 12:21pm

आ0 गुमनाम पिथौरा गढ़ी  जी , आपको ग़ज़ल पसंद आई ,तहे दिल से आभार आपका |मेरा लिखना सार्थक हुआ.

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