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मदिरा सवैया (महिला दिवस की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ)

 (१ )

भारत की हम नार, बढ़ें खुद आज लिए नव छत्र चलो|

जीवन में अब हार, सहें मत ख़ार लिखें इक पत्र  चलो|

ले कर में पतवार, करें तट पार रचें नव सत्र चलो|

साथ मिला कर हाथ, सधे हर काज बने शतपत्र चलो||

 

(2)

जीवन में नित प्यार, रहे दरकार बढ़े  नव प्रीत चलो|

वर्ण मिलाकर आज, चलें इक साथ रचें इक  गीत चलो||

पाँव बढ़े इक साथ, सभी नर नार बनें सत मीत चलो|

एक नया इतिहास, लिखें हम आज मिले नव जीत चलो||

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 26, 2014 at 8:48pm

हार्दिक आभार आदरणीय  सौरभ जी प्रस्तुति पर आपका अनुमोदन मिला मेरा लिखना सार्थक हुआ. 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 26, 2014 at 4:14pm

वाह वाह..  आवाहन करती हुई पंक्तिाँ शिल्प के अनुशासन में हैं, आदरणीया राजेशजी. बधाई

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 9, 2014 at 9:50am

प्रिय वंदना आपको छंद उसके भाव पसंद आये  मेरा लिखना सार्थक हुआ ,आपको भी महिला दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें. 

Comment by Vindu Babu on March 8, 2014 at 3:36am

आदरणीया राजेश जी: छंद का कथ्य बड़ा ही उत्साह वर्धक और सुखद लगा. महिला दिवस की आपको भी ढेरों शुभकामनायें आदरणीया। सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 7, 2014 at 8:37pm

केवल प्रसाद जी हृदय से आभार आपका ,सवैये आपको पसंद आये ,लिखना सार्थक हुआ. 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 6, 2014 at 9:25pm

आ0 राजेश कुमारी जी, बहुत ही सुन्दर सवैया छंद । हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 5, 2014 at 6:17pm

आ० कल्पना मिश्रा बाजपेयी जी, आपकी प्रतिक्रिया से मेरा मन भी उत्साहित हो गया दिल से आभारी हूँ.  

Comment by kalpna mishra bajpai on March 5, 2014 at 6:06pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी आप की रचना पढ़ कर मन उत्साहित हो गया बहुत बहुत बधाई सादर !!!!!!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 5, 2014 at 5:31pm

आदरणीय डॉ० आशुतोष मिश्रा जी, इस प्रस्तुति के भाव आपको प्रभावित कर सके मेरा लिखना सार्थक हुआ इसी तरह उत्साह वर्धन करते रहें ,हार्दिक आभार आपका . 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 5, 2014 at 5:29pm

आदरणीय प्रदीप कुमार कुशवाह जी, इन सवैयों के भाव आपको पसंद आये मेरा लिखना सार्थक हुआ ,दिल से आभारी हूँ. 

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