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चलो मिलते हैं वहाँ ........ मीना पाठक

धरती के उस छोर पर 
धानी चूनर ओढ़ कर    
वसुधा मिलती हैं अनन्त से जहाँ
चलो मिलते हैं वहाँ !!
 
बन्धन सारे तोड़ कर
लहरों की चादर ओढ़ कर
दरिया मिलता है किनारे से जहाँ
चलो मिलते हैं वहाँ!! 

पर्वतों से निकल कर
लम्बी दूरी चल कर
नदियाँ मिलती है सागर से जहाँ
चलो मिलते हैं वहाँ!! 

बसंती भोर में
खिले उपवन में
भँवरे फूलों से मिलते हैं जहाँ
चलो मिलते हैं वहाँ !!

स्वाति नक्षत्र के
वर्षा की इक बूँद से
तृप्त हो चातक मिलता है जहाँ
चलो मिलते हैं वहाँ!! 

पूनम की रात में
चाँदनी विस्तार से
किलोल करती मिलती हैं जहाँ
चलो मिलतें हैं वहाँ !!
 

जमुना के तट पर
बाँध उमंगो की डोर
मिलती है राधा कृष्ण से जहाँ
चलो मिलते हैं वहाँ !!

सांसों की लय तोड़ कर
नश्वर काया छोड़ कर
आत्मा परमात्मा से मिलती है जहाँ
चलो मिलते हैं वहाँ !!

मीना पाठक 

मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 886

Comment

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Comment by savitamishra on January 16, 2014 at 10:45pm

सुन्दर रचना

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 4:11pm

मेरी झोली बहुत से वरिष्ठों की टिप्पणियों से खाली ही रहती है :(

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 4:10pm

आदरणीय अरुन जी हम कमजोर विद्द्यार्थियों की तरफ भी ध्यान दिया करें आप लोग | बहुत बहुत आभार रचना सराहने हेतु 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 2, 2013 at 4:06pm

वाह वाह आदरणीया इतनी सुन्दर रचना देर से पढ़ने हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ पढ़कर कर मुग्ध हूँ ह्रदय सराबोर कर दिया आपने दिल से बहुत बहुत बधाई आपको.

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 2:11pm

हा हा हा .... बहुत बहुत आभार प्रिय गीतिका 

Comment by वेदिका on December 2, 2013 at 1:43pm

मिलने के लिए जितनी भी जगह तय करीं है, वे अद्भुत है, अनुपम है, और उतनी ही अनुपम है ये रचना|

सहस्त्र बधाई आ० मीना दी! 

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 1:41pm

परम आदरणीय विजय निकोर जी रचना को टिप्पणी रूप मे आशीर्वाद देने के लिए हृदयतल से आभार |सादर 

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 1:40pm

प्रिय राम शिरोमणि बहुत बहुत आभार 

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 1:39pm

कोई बात नही आदरणीया राजेश कुमारी जी देर से सही आप मेरी रचना पर आयीं तो, यही बहुत है मेरे लिए | रचना सराहने के लिए दिल से आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on December 2, 2013 at 1:36pm

आदरणीय गिरिराज जी तीन बार आशीर्वाद देने के लिए हृदय से आभार स्वीकार कीजिये :)

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