For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बात एक रात की,

मैं था सोया

मीठे सपनो में खोया

तभी सपनो में आयी

एक सुन्‍दर नारी

दमकता चेहरा पर उदास

उज्‍जवल वस्‍त्र पर गंदे

कीचड में सने

मैं इर कर कॉंप उठा

हमें डरते देख

वो बोली

डरते क्‍यों हो

हमें नहीं पहचाना

मैं हॅू तुम्‍हारी गंगा

वही गंगा जिसे तुम मॉं कहते हो

पापो को धुलने वाली गंगा

सभ्‍यता और संस्‍कृति

प्रदान करने वाली गंगा

देहवासन पर मोक्ष

देने वाली गंगा

वहीं गंगा जो

तुम्‍हारे पूरखो को तारने

धरती पर आयी

पर आज क्‍या है मेरा वजूद

मि‍टने के कागार पर हूँ

स्‍वार्थ में अँन्‍धे होकर

क्‍या हाल बना दि‍या है

गंगोत्री से गंगासागर तक

खाती रही पत्‍थरों की ठोकर

कंकड; चुभते रहे मेरे बदन पर

मैं चुपचाप  सब सहती रही

नि‍स्‍वार्थ सेवा करती रही

ऑंखो में ऑंसू थाम कर वोली

क्‍या यही था मेरा कसूर

आज मैं इतनी मैली और गंदी क्‍यो

मेरा नीर जो मेरी पहचान था

कहाँ गया,क्‍यो गया,कैसे गया

कहॅां गई वह

पवित्र,पावन, निर्मल गंगा

अविरल प्रवाहिनी गंगा

हे मानव अब बस करो

रहम करो,

बहुत राजनीति कि‍ये मेरे नाम पर

खा गये करोडों मेरे नाम पर

फि‍र भी नही मि‍टी तुम्‍हारी भूख

बंद करो अपना ये

घिनौना खेल तुम

नहीं तो मिट जायेगी

तुम्‍हारी ये गंगा

खत्‍म हो जायेगी

गंगा पर आधारित

तुम्‍हारी सभ्‍यता और संस्‍क़ति

गंगा बन जायगी अखंड

इति‍हास के पन्‍नो की नई कहानी

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

 

Views: 330

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 16, 2013 at 12:05pm

akhand ji ..is sunder rachna par meri taraf se haardik badhaaayee sweekarein 

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on November 16, 2013 at 11:19am

सुन्दर रचना  !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 15, 2013 at 9:27am

बहुत बढ़िया आदरणीय अखंडजी बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
52 minutes ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
56 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service