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मुझे पागल बताया जा रहा है ( गज़ल ) गिरिराज भंडारी

2122      2122      2122       2122

 

ज़ख़्म सूखे हैं तो फिर क्यों दर्द फैला जा रहा है  

क्यों मुझे वो दिन पुराना याद आता जा रहा है

 

भीड़ मे रहना मुझे फिर बोझ सा लगने लगा क्यों   

और तनहा कोई कोना क्यों बुलाता जा रहा है

 

फिर वही झरने की कल कल, फिर वही ठंडी हवायें

फिर कोई पागल परिन्दा गीत गाता जा रहा है

 

कोई सपना फिर पुराना आँखों मे पलने लगा क्यों

अजनबी सा डर है तारी दिल धड़कता जा रहा है  

 

फिर से नामावर का रस्ता देखने का दिल किया क्यों

क्यों कबूतर ख़्वाब में फिर रोज़ आता जा रहा है 

 

फिर से बच्चे आज पत्थर क्यों जमा करने लगे अब

फिर मुहल्ले में मुझे पागल बताया जा रहा है

 

फिर से दुनिया की नज़र फिरने लगी मै देखता हूँ

ज़ेह्ने दुनिया क्या कोई साजिश रचाता जा रहा है

                     ********************

नामावर = पत्र वाहक

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 10, 2013 at 1:51pm

आदरणीय केवल भाई , !!!!! गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 10, 2013 at 1:49pm

आदरणीय सुर्या बाली जी ,!!!! गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!! ऐसे ही स्नेह बनाये रखें !!!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 10, 2013 at 1:47pm

आदरणीय अरुण निगम भाई , !!!!! ग़ज़ल की सराहना और एक शे र को विशेष मान देने के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ !!!!!!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 10, 2013 at 12:43pm

आदरणीय भण्डारी भाई जी, बहुत खूब! लाजवाब अश'आर हुए हैं। हार्दिक बधाई स्वीकारें।  सादर,

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on November 10, 2013 at 12:31pm

गिरिराज जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई ...माँशाल्लाह हर एक शेर लाजवाब और ये शेर तो बेहद उम्दा हुआ है।

फिर वही झरने की कल कल, फिर वही ठंडी हवायें

फिर कोई पागल परिन्दा गीत गाता जा रहा है

दिली दाद कुबूल करें !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 10, 2013 at 9:54am

आदरणीय गिरिराज जी शानदार ग़ज़ल सुनाने के लिए आभार. 

भीड़ मे रहना मुझे फिर बोझ सा लगने लगा क्यों   

और तनहा कोई कोना क्यों बुलाता जा रहा है

 

इस अश'आर के लिए खासतौर से दाद स्वीकार करें...................


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 10, 2013 at 9:23am

आदरणीय अजय भाई , !!!!! ग़ज़ल की सराहना कर , उत्साह वर्धन करने के लिये आपका बहुर आभारी हूँ !!!!!!

Comment by ajay sharma on November 9, 2013 at 10:45pm

फिर से बच्चे आज पत्थर क्यों जमा करने लगे अब

फिर मुहल्ले में मुझे पागल बताया जा रहा है..........bahut hi sunder sher ...... 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 9, 2013 at 9:35pm

आदरणीय सुशील भाई , हृदय से दी गई बधाई हृदय तक पहुंची !!!! आदरणीय, उत्साह वर्धन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 9, 2013 at 9:33pm

आदरणीय बड़े भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ !!!!!

कृपया ध्यान दे...

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