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रावण, रावण को आग लगाये

कलियुग की कैसी माया देखो

रावण, रावण को आग लगाये

दशानन था रावण

इनके हैं सौ- सौ सर

लोभ, मोह, मद, इर्ष्या ,

द्वेष, परिग्रह, लालच,

राग , भ्रष्टाचार, मद, मत्सर

रहे बजबजा इनके भीतर

फिर भी  जरा नहीं शर्माए .

कलियुग की कैसी माया देखो

रावण, रावण को आग लगाये .

पंडित था रावण ,

था, अति बलशाली ,

धर्महीन हैं ये, हृदयहीन ,

विवेकशून्य , मर्यादा से खाली.

आचरण हो जिनका राम सा

जनता जिनके राज्य में

भयमुक्त हो, फूले नहीं समाये.

उन्हें ही हक है, आगे आकर

रावण को आग लगाये .

... नीरज कुमार ‘नीर’

पूर्णतः मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Neeraj Neer on October 14, 2013 at 1:44pm

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आभार आपका ..

Comment by Neeraj Neer on October 14, 2013 at 1:43pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी हार्दिक आभार .

Comment by Neeraj Neer on October 14, 2013 at 1:43pm

आदरणीय अरुण भाई जी प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक आभार.

Comment by Neeraj Neer on October 14, 2013 at 1:42pm

आभार आदरणीय कपिश जी .. आपने गहराई से रचना का अवलोकन किया , बहुत आभार ..

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 14, 2013 at 1:13pm

कलियुग में रावण ही रावण को मार रहा है , राम की तलाश है ।  सुंदर व्यंग्य की बधाई नीरज भाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 14, 2013 at 12:49pm

आदरणीय नीरज भाई , सत्य वचन !!!! , सुंदर रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई !!!!

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 14, 2013 at 12:37pm

बहुत खूब आदरणीय नीरज भाई बेहतरीन कटाक्ष क्या कहने सुन्दरता से वर्तमान परिस्थति का चित्रण बहुत बहुत बधाई

Comment by Kapish Chandra Shrivastava on October 14, 2013 at 12:25pm


    आदरणीय नीरज कुमार जी , बहुत बढ़िया  रचना है आपकी । लोभ,मोह ,भ्रष्टाचार ----- इत्यादि गंदगियों के साथ बजबजना शब्द बड़ा सार्थक लगा । सच कहा है आपने राम या राम जैसे व्यक्तित्व वालों को ही रावण जलाने का अधिकार है । अनेकों बधाई । 

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