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गजल: मेरे तन को ना छुओ तुम तेरा हाथ जल न जाए...

गजल— 1121/2122/1121/2122

तेरे रूप का ये जादू कहीं मुझपे चल न जाए
यूं बिखेरो ना ये जुल्फें कहीं दिल मचल न जाए

मेरे दिल की इस जमीं पे कोई फूल खिल रहा है
तेरे प्यार का ये मौसम कहीं फिर बदल न जाए

तूने खोल दी है जुल्फें लगे दिन चढ़ा है फिर से
'न झुकाओ तुम निगाहें कहीं रात ढल न जाए'

तेरी याद का है जंगल यहां आग सी लगी है
मेरे तन को ना छुओ तुम तेरा हाथ जल न जाए

इसी सोच में हूं डूबा कि पहुंचे बात उन तक
ऐ ‘शकील’ फिर से बेकार तेरी गजल न जाए

-शकील जमशेदपुरी

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Comment by शकील समर on October 6, 2013 at 3:39pm

इस्लाह करने के लिए बहुत—बहुत आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 6, 2013 at 3:22pm

आदरणीय शकील भाई , लाजवाब ग़ज़ल के लिये आपको बहुत बधाई !!! हर शेर सुन्दर हैं !!!

इसी सोच में हूं डूबा कि पहुंचे बात उन तक
ऐ ‘शकील’ फिर से बेकार तेरी गजल न जाए --------- बहुत बढ़िया !!! ( ऐ की मात्रा शायद गिराई नही जा सकती , थोडा देखियेगा )

Comment by शकील समर on October 6, 2013 at 2:27pm

हौसला बढ़ाने के लिए शुक्रिया आदरणीय सरिता भाटिया जी, अभिनव अरुण जी, सारथी जी और आशीष नैथानी 'सलिल' जी।

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on October 6, 2013 at 2:18pm

बढ़िया ग़ज़ल भाई शकील जी  !

Comment by Saarthi Baidyanath on October 6, 2013 at 2:13pm

बेहतरीन है शकील साहब ... :)

Comment by Abhinav Arun on October 6, 2013 at 2:09pm

तेरी याद का है जंगल यहां आग सी लगी है
मेरे तन को ना छुओ तुम तेरा हाथ जल न जाए

इसी सोच में हूं डूबा कि पहुंचे बात उन तक
ऐ ‘शकील’ फिर से बेकार तेरी गजल न जाए

                   ........सभी शेर ख़ास तौर पे ये ...वाह ...सुन्दर अश'आरो से सजी ग़ज़ल , हार्दिक बधाई ...और खुशामदीद ओ बी ओ पर !!

Comment by Sarita Bhatia on October 6, 2013 at 2:09pm

अच्छी गजल हुई है शकील जी 

Comment by शकील समर on October 6, 2013 at 1:30pm

हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया आदरणीय सुशील जोशी जी......

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 1:24pm

सुंदर भावाभिव्यक्ति की है आदरणीय शकील भाई.....

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