For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सफ़र

ओ बी ओ के संग मेरा, सफ़र पुराना भाई,

जानते नहीं जो मुझे, जान लो क़रीब से।

धन औ दौलत से भी, बड़ी चीज़ पाई मैंने,

शारदे की कृपा मिली, मुझको नसीब से।

लेखन में रुचि मेरी, लेखन ही जान मेरी,

लेखन है प्रिय मुझे, अपने हबीब से।

जियूँ तो कलम हाथ, मरूँ तो कलम साथ,

मानना हे प्रभु यह, विनती ग़रीब से।

----------------------------------- सुशील जोशी

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 793

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil.Joshi on October 7, 2013 at 8:59pm

इस कृपा दृष्टि के लिए आपका अतिश: धन्यवाद आदरणीया डॉ. प्राची....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 6, 2013 at 3:49pm

एक शब्द साधक के रूप में इस पावन मंच के प्रति आत्मीयता और लेखन के प्रति निष्ठा व प्रेम को सुन्दर कवित्त में व्यक्त किया है 

हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 1:32pm

बहुत बहुत धन्यवाद आपका आदरणीय बृजेश जी....

Comment by बृजेश नीरज on October 6, 2013 at 7:14am

नए सदस्यों को अपना परिचय उपलब्ध कराकर आपने बहुत ही पुनीत कार्य किया है! आपको  बहुत बधाई और शुभकामनायें!

सादर!

Comment by vijay nikore on October 6, 2013 at 3:06am

अति सुन्दर परिचय !

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:34am

स्नेहिल टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार आपका आदरणीय जितेन्द्र भाई जी...

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:33am

शुभाशीष के लिए हार्दिक धन्यवाद आपका आदरणीय अनुराग भाई साहब....

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:31am

बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय रविकर जी...

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 5, 2013 at 11:08pm

सुंदर रचना, बहुत बहुत बधाई आदरणीय शुशील जी

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 5, 2013 at 9:21pm

बहुत बहुत शुभ कामनाये बड़े भाई साहब ! 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service