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जीवन के रेगिस्तान में

जाने कितने बसंत
शीत,पतझड़, सावन
आये गये
तपती,भीगती,ठिठुरती
मुरझाती पर फिर भी
चलती रही अनवरत
हाँफती,दौड़ती,पसीजती
डोर अपनी साँसों की पकड़े
कोलाहल अंतर का समेटे
मूक, निःशब्द बस्
अपने काफिले के साथ
बढ़ती ही गई
जीवन के पथ पर !!

अपनी साँसें संयत करने को
रुकी इक पल को
पीछे मुड़ कर देखा जो
छोड़ गये थे सभी मुझको
मेरे पीछे था अब सुनसान
आगे वियावान
नीचे तपती रेत
ऊपर सुलगता आसमान
बीच में झुलसती मैं
अकेली जीवन के रेगिस्तान में ||

मीना पाठक 

मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 808

Comment

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Comment by Meena Pathak on October 1, 2013 at 7:39am

आ० महिमा जी 
आप की निःशब्द करती टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार  :)

Comment by Meena Pathak on October 1, 2013 at 7:38am

रचना सराहने के लिए आभार प्रिय राम जी 

Comment by MAHIMA SHREE on September 30, 2013 at 9:21pm

अपनी साँसें संयत करने को
रुकी इक पल को
पीछे मुड़ कर देखा जो
छोड़ गये थे सभी मुझको
मेरे पीछे था अब सुनसान आगे वियावान
नीचे तपती रेत
ऊपर सुलगता आसमान ..... आदरणीया मीना जी .. आशा है ये सिर्फ मन के भाव हैं .. जीवन के नहीं .... क्योंकि अंत में आते आते .. रचना जैसे हमें भी निशब्द तपती रेत में अकेला खडें होने का एहसास कराती है .... बहुत -२ बधाई आदरणीया ...

Comment by ram shiromani pathak on September 30, 2013 at 8:16pm

अपनी साँसें संयत करने को 
रुकी इक पल को 
पीछे मुड़ कर देखा जो 
छोड़ गये थे सभी मुझको 
मेरे पीछे था अब सुनसान 
आगे वियावान 
नीचे तपती रेत 
ऊपर सुलगता आसमान 
बीच में झुलसती मैं
अकेली जीवन के रेगिस्तान में || 

वाह आदरणीया मीना दीदी अनुपम प्रस्तुति //हार्दिक बधाई आपको //सादर

Comment by Meena Pathak on September 30, 2013 at 6:47pm

हार्दिक आभार आदरणीय बृजेश जी  उत्साह वर्धन हेतु | सादर 

Comment by बृजेश नीरज on September 30, 2013 at 6:26pm

निशब्द कर गयी आपकी ये रचना! भावों की गहराई के साथ ही कसा हुआ शिल्प बरबस पाठक को बांधे रखता है.

इस सशक्त अभिव्यक्ति पर आपको हार्दिक बधाई! 

Comment by Meena Pathak on September 30, 2013 at 2:34pm

हार्दिक आभार आ० विजय जी 

Comment by विजय मिश्र on September 30, 2013 at 12:17pm
श्रेष्ठ अभिव्यक्ति . साधुवाद मीनाजी .
Comment by Meena Pathak on September 30, 2013 at 11:39am

आदरणीय जितेन्द्र जी रचना सराहने हेतु हार्दिक आभार 

Comment by Meena Pathak on September 30, 2013 at 11:38am

परम आदरणीय विजय निकोर जी सादर प्रणाम

रचना पर आप की उपस्थिति मेरे लिए आशीर्वाद है आप का, आशा करती हूँ कि आप का आशीर्वाद यूँ ही मिलता रहेगा |
सादर आभार

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