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माँ तुम्हारा कर्ज चुकाना है

छन्द मुक्त रचना

नौ महीने
अपनी कोख में सम्भाला
पीड़ा सहकर
लायी मुझे दुनिया में
जानती हूँ
बहुत दुःख सह, ताने सुन
जन्म दिया मुझे

मैंने सुना था, माँ!
जब बाबा ने तुम्हें धमकाया था
कोख में ही मारने का
दबाव बनाया था
दादी ने क्या-क्या नही सुनाया!
पर तुम!
न डरी, न झुकी
मुझे जन्म दिया

हमारे होते भी
तुम निपूतनी कहलाई
पर तुम्हारे
प्यार में कमी न आई

तुम्हारे आँसुओं का
मोल चुकाना है
बेटी के जन्म से
झुका तुम्हारा सिर
गर्व से उठाना है
माँ! तुम्हारा कर्ज चुकाना है ||

मीना पाठक

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 723

Comment

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Comment by Meena Pathak on September 26, 2013 at 1:18pm

हार्दिक आभार आ० प्राची जी हौसलाअफजाई और रचना सराहने हेतु | सादर  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 26, 2013 at 11:36am

बेटी के जन्म से
झुका तुम्हारा सिर.................उफ्फ कितनी पीड़ा है इस पंक्ति में 
गर्व से उठाना है
माँ! तुम्हारा कर्ज चुकाना है.............और ये गर्व का ज़ज्बा...प्रेम...आत्मविश्वास 

इस सुन्दर संवेदनशील कथ्य को प्रस्तुत करी अभिव्यक्ति पर हार्दिक बधाई  

Comment by Meena Pathak on September 23, 2013 at 7:28pm

परम आदरणीय विजय निकोर जी बहुत बहुत आभार 

Comment by Meena Pathak on September 23, 2013 at 7:27pm

आ० अरुन शर्मा जी बहुत आभार 

Comment by Meena Pathak on September 23, 2013 at 7:26pm

परम आदरणीय लाडलीवाल जी हार्दिक आभार 

Comment by Meena Pathak on September 23, 2013 at 7:22pm

आ० आशीष नैथानी जी बहुत बहुत आभार 

Comment by vijay nikore on September 23, 2013 at 6:26pm

समाज की समस्या हम सभी की समस्या है,

और इसके हल का दायित्व भी हम सभी पर है।

 

इस सुन्दर रचना के लिए बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 23, 2013 at 5:46pm

आदरणीया मीना जी बेटी का माँ के प्रति और माँ का बेटी के प्रति प्रेम का सुन्दर उदहारण दिया है बहुत ही सुन्दर रचना बधाई स्वीकारें.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 23, 2013 at 4:05pm

बेटी का माँ के प्रति दायित्व बोध कराती सुन्दर भाव रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया मीना पाठक जी | सादर 

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on September 23, 2013 at 10:05am

माँ को समर्पित सुन्दर रचना हेतु बधाइयाँ आदरणीया मीना जी !

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