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ग़ज़ल - इल्म की रोशनी नहीं होती !

ग़ज़ल –

२१२२   १२१२   २२

इल्म की रोशनी नहीं होती ,

ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं होती |

 

एक कोना दिया है बच्चों ने ,

और कुछ बेबसी नहीं होती |

 

रंग आये कि सेवई आये ,

तनहा कोई ख़ुशी नहीं होती |

 

दिल के टूटे से शोर होता है ,

ख़ामुशी ख़ामुशी नहीं होती |

 

सारे चेहरे छुपे मुखौटों में ,

दिल में भी सादगी नहीं होती |

 

माँ के आँचल से दूर हैं बच्चे ,

बाप से बंदगी नहीं होती |

 

जी हुज़ूरी करूँ सलामी दूं ,

मुझसे ये नौकरी नहीं होती |

 

झूठ छाया है हर रिसाले में ,

सच की सुर्खी कभी नहीं होती |

 

*दौरे हाज़िर भी एक बवंडर है ,

आँधियों की कमी नहीं होती |

*संशोधित 

(मौलिक और अप्रकाशित)

        - अभिनव अरुण 

          [१२०९२०१३]

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Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 7:41pm

ग़ज़ल पसंद आई लिखना सार्थक हुआ आ. डॉ आशुतोष जी शुक्रिया आपका !!

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 7:39pm

आ. डाक्टर साहिबा ग़ज़ल के अनुमोदन के लिए आभार बहुत बहुत !

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 7:15pm

आ. विजय श्री जी आभार ग़ज़ल पसंद करने के लिए !

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 7:13pm

आ. एडमिन जी हार्दिक शुक्रिया संशोधन हेतु !

Comment by vijayashree on September 14, 2013 at 6:05pm

हर शेर काबिलेतारिफ़ है 

बधाई स्वीकारें  अभिनव अरुण जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 14, 2013 at 5:41pm

आ० अभिनव अरुण जी 

हर शेर शानदार हुआ है..

बहुतबहुत बधाई इस उम्दा गज़ल पर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 14, 2013 at 12:55pm

आदरनीय अभिनव जी ..बेहतरीन ग़ज़ल का हर शेर उम्दा है ..

झूठ छाया है हर रिसाले में ,

सच की सुर्खी कभी नहीं होती .ये शेर मुझे बेहद पसंद आया ..सादर बधाई के साथ 

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 9:36am

श्री गिरिराज जी शिज्जू जी ब्रीजेश जी बहुत शुक्रिया आप सबका ..तागाफुले रदीफ़ की और ध्यान दिलाने का शुक्रिया इसे ठीक कर रहा हूँ फिर शेर यूं होगा --

दौरे हाज़िर भी एक बवंडर है ,

आंधियों की कमी नहीं होती | 

           ... शुक्रिया आप सबका !!

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 9:34am

आ. ब्रिजेश जी और गिरिराज जी आप सबने मेरी ग़ज़ल पर अपनी अपनी खामुशी तोड़ी इसके लिए शुक्रिया हौसला बढाने के लिए हार्दिक आभार आप द्वय का !!

Comment by Abhinav Arun on September 14, 2013 at 9:32am

आ. अन्नपूर्णा जी , अरुण जी , जितेन्द्र जी , मोहन जी , बहुत आभार ग़ज़ल को सराहने के लिए स्नेह बना रहे यही कामना है !१ 

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