For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चाहे छोटी हो या बड़ी बेटी

चाहे छोटी हो या बड़ी बेटी
दिल में रहती है हर घड़ी बेटी
उसके दम से है रौशनी घर में
जैसे दीपों की हो लड़ी बेटी
उससे होली भी है दीवाली भी
वो है प्यारी सी फुलझड़ी बेटी
जब कभी घर में हो गई अनबन
तो बनी प्यार की कड़ी बेटी
इस तरह से संभालती है मुझे
जैसे हो मुझसे भी बड़ी बेटी
कैसे दुनियां को जान पायेगी

घर में शामो सहर पड़ी बेटी

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 734

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 11, 2013 at 4:49pm

बिटिया को समर्पित हृदय स्पर्शी खूबसूरत गज़ल 

बरबस गुनगुनाने को बाध्य करती सुन्दर प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई 

Comment by Sushil Thakur on September 10, 2013 at 11:40pm

bahut bahut shukriya sabhi aadarneey ka

Comment by annapurna bajpai on September 10, 2013 at 10:19pm

 आ0 सुशील जी बेटियाँ ऐसी ही होती है , बहुत बधाई आपको सादर ।

 

 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on September 10, 2013 at 8:27pm
चाहे छोटी हो या बड़ी बेटी
दिल में रहती है हर घड़ी बेटी 
उसके दम से है रौशनी घर में
जैसे दीपों की हो लड़ी बेटी 
बहुत ही सुन्दर रचना! यही भाव हम सबके दिल में रहनी चाहिए!
Comment by Parveen Malik on September 10, 2013 at 7:15pm
बेटियाँ खुशियों का संसार समाये हुये हैं खुद में बस जरूरत है तो महसूस करने की ... बहुत बढिया रचना आदरणीय .....बधाई !!
Comment by Dr Ashutosh Vajpeyee on September 10, 2013 at 1:21pm

sunder kriti

Comment by रविकर on September 10, 2013 at 11:28am

बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आदरणीय-
बधाई स्वीकारें
सादर

चिंतित मानस पटल है, विचलित होती बुद्धि |
प्रतिदिन पशुता बलवती, दुष्कर्मों में वृद्धि |


दुष्कर्मों में वृद्धि, कहाँ दुर्गा है सोई |
क्यूँ नहिं होती क्रुद्ध, जगाये उनको कोई |


कर दे माँ उपकार, दया कर दे माँ समुचित |
हम बेटी के बाप, हमेशा रहते चिंतित ||

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 10, 2013 at 9:13am

बहुत ही शानदार और मार्मिक ग़ज़ल शुशील जी ... बधाई स्वीकार करें ...

Comment by Meena Pathak on September 9, 2013 at 10:49pm

बेटी एक प्यारा सा रिश्ता एक प्यारा सा एहसास !!

बहुत सुन्दर रचना .. हार्दिक बधाई

Comment by vijayashree on September 9, 2013 at 10:40pm

घर भर की है शान बेटियाँ 

जीवन की है आन बेटियाँ 

दिल में  जो बस जाती है 

वो प्यारा अहसास बेटियाँ 

बेटियों के प्रति बहुत प्यारा अहसास दर्शाती सुंदर अभिव्यक्ति 

हार्दिक बधाई सुशील ठाकुर जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Feb 28
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Feb 28

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service