For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चाहे छोटी हो या बड़ी बेटी

चाहे छोटी हो या बड़ी बेटी
दिल में रहती है हर घड़ी बेटी
उसके दम से है रौशनी घर में
जैसे दीपों की हो लड़ी बेटी
उससे होली भी है दीवाली भी
वो है प्यारी सी फुलझड़ी बेटी
जब कभी घर में हो गई अनबन
तो बनी प्यार की कड़ी बेटी
इस तरह से संभालती है मुझे
जैसे हो मुझसे भी बड़ी बेटी
कैसे दुनियां को जान पायेगी

घर में शामो सहर पड़ी बेटी

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 755

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 11, 2013 at 4:49pm

बिटिया को समर्पित हृदय स्पर्शी खूबसूरत गज़ल 

बरबस गुनगुनाने को बाध्य करती सुन्दर प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई 

Comment by Sushil Thakur on September 10, 2013 at 11:40pm

bahut bahut shukriya sabhi aadarneey ka

Comment by annapurna bajpai on September 10, 2013 at 10:19pm

 आ0 सुशील जी बेटियाँ ऐसी ही होती है , बहुत बधाई आपको सादर ।

 

 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on September 10, 2013 at 8:27pm
चाहे छोटी हो या बड़ी बेटी
दिल में रहती है हर घड़ी बेटी 
उसके दम से है रौशनी घर में
जैसे दीपों की हो लड़ी बेटी 
बहुत ही सुन्दर रचना! यही भाव हम सबके दिल में रहनी चाहिए!
Comment by Parveen Malik on September 10, 2013 at 7:15pm
बेटियाँ खुशियों का संसार समाये हुये हैं खुद में बस जरूरत है तो महसूस करने की ... बहुत बढिया रचना आदरणीय .....बधाई !!
Comment by Dr Ashutosh Vajpeyee on September 10, 2013 at 1:21pm

sunder kriti

Comment by रविकर on September 10, 2013 at 11:28am

बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आदरणीय-
बधाई स्वीकारें
सादर

चिंतित मानस पटल है, विचलित होती बुद्धि |
प्रतिदिन पशुता बलवती, दुष्कर्मों में वृद्धि |


दुष्कर्मों में वृद्धि, कहाँ दुर्गा है सोई |
क्यूँ नहिं होती क्रुद्ध, जगाये उनको कोई |


कर दे माँ उपकार, दया कर दे माँ समुचित |
हम बेटी के बाप, हमेशा रहते चिंतित ||

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 10, 2013 at 9:13am

बहुत ही शानदार और मार्मिक ग़ज़ल शुशील जी ... बधाई स्वीकार करें ...

Comment by Meena Pathak on September 9, 2013 at 10:49pm

बेटी एक प्यारा सा रिश्ता एक प्यारा सा एहसास !!

बहुत सुन्दर रचना .. हार्दिक बधाई

Comment by vijayashree on September 9, 2013 at 10:40pm

घर भर की है शान बेटियाँ 

जीवन की है आन बेटियाँ 

दिल में  जो बस जाती है 

वो प्यारा अहसास बेटियाँ 

बेटियों के प्रति बहुत प्यारा अहसास दर्शाती सुंदर अभिव्यक्ति 

हार्दिक बधाई सुशील ठाकुर जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service