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वादों  की बौछार के साथ 
नेता जी प्रगट हुए 
बिन बुलाये प्रेत की तरह 
मटरू को नौकरी 
गाँव में पक्की सड़क 
विद्यालय ,चिकित्सालय 
आदि आदि का निर्माण 
शब्दों के महाजाल  से
समस्याओं के सागर का 
पूरा का पूरा पानी 
झट से पी  गए
गटाक एक बार में    
लोग बड़े ध्यान से सुन रहे थे 
कुछ दिन पहले 
जो गूंगे बहरे लगते थे मुझे 
इनको क्या पता 
दाग लगे कपड़ों की तरह 
टांग दिए जायेंगे 
स्वार्थ की खूँटी पर 
पहले की तरह 
**************************
**************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"

मौलिक /अप्रकाशित

Views: 807

Comment

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Comment by ram shiromani pathak on September 4, 2013 at 2:10pm

 हार्दिक  आभार  आदरणीया गीतिका  जी //सादर 

Comment by वेदिका on September 4, 2013 at 2:07pm

बढ़िया अभिव्यक्ति !!

बधाई !!

Comment by ram shiromani pathak on September 4, 2013 at 1:56pm

बहुत  बहुत  आभार  आदरणीया मीना  जी //सादर 

Comment by ram shiromani pathak on September 4, 2013 at 1:56pm

बहुत  बहुत  आभार  आदरणीय गिरिराज जी //सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2013 at 12:30pm
राम शिरोमनी भाई , बहुत अच्छी अतुकांत रचना , बहुत अच्छा राजनीतिक व्यंग, बधाई !!!!!
Comment by Meena Pathak on September 4, 2013 at 9:02am

सुन्दर रचना हेतु बधाई स्वीकारें

Comment by ram shiromani pathak on September 3, 2013 at 8:40pm

बहुत  बहुत  आभार  आदरणीय रविकर जी,स्नेह यूँ ही बनाए रखें  //सादर

Comment by ram shiromani pathak on September 3, 2013 at 8:39pm

बहुत  बहुत  आभार  आदरणीय भाई ब्रिजेश जी,स्नेह यूँ ही बनाए रखें  //सादर

Comment by रविकर on September 3, 2013 at 7:58pm

गजब अभिव्यक्ति-
सत्य सार्थक
आभार प्रिय "दीपक"

Comment by बृजेश नीरज on September 3, 2013 at 7:18pm

आदरणीय राम भाई आपके प्रयासों से लग रहा है कि आप अतुकान्त पर आजकल कार्य कर रहे हैं। सतत प्रयास से यह विधा भी आपकी होगी।
आपको हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं!

कृपया ध्यान दे...

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