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ढाई आखर प्याज का ........अरुण कुमार निगम

प्याजी दोहे.....

मंडी की छत पर चढ़ा, मंद-मंद मुस्काय
ढाई आखर प्याज का, सबको रहा रुलाय ||

प्यार जताना बाद में , ओ मेरे सरताज
पहले लेकर आइये, मेरी खातिर प्याज ||

बदल   गये   हैं   देखिये , गोरी  के  अंदाज
भाव दिखाये इस तरह,ज्यों दिखलाये प्याज ||

तरकारी बिन प्याज की,ज्यों विधवा की मांग
दीवाली  बिन दीप की   या   होली बिन भांग ||

महँगाई  के  दौर  में , हो सजनी नाराज
साजन जी ले आइये, झटपट थोड़े प्याज ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)

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Comment by अरुन 'अनन्त' on August 27, 2013 at 3:38pm

वाह वाह आदरणीय गुरुदेव श्री बेहद सुन्दर प्याजी दोहावली रची है आपने, आनंद आ गया पढ़कर हार्दिक बधाई स्वीकारें.

दाम बढ़ें हैं प्याज के, रुपया लुढ़का जाय.

बिन काटे नैना भरे, कट कर रही रूलाय..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on August 27, 2013 at 1:18pm

//प्यार जताना बाद में , ओ मेरे सरताज
पहले लेकर आइये, मेरी खातिर प्याज

महँगाई  के  दौर  में , हो सजनी नाराज
साजन जी ले आइये, झटपट थोड़े प्याज // वाह आदरणीय अरुण सर आपके प्याज़ी दोहों ने तो कमाल कर दिया बधाई कुबूल करें

Comment by रविकर on August 27, 2013 at 12:24pm

आदरणीय अरुण भैया-
हमें भी यह सन्देश मिला है-

ठेले बरबस खींचते, मन भर भर के प्याज |
पिया बसे परदेश में, यहाँ छिछोरे आज |


यहाँ छिछोरे आज, बड़ा सस्ता दे जाते |
रविकर नाम उधार, तकाजा करने आते |


आया है सन्देश, बड़े हो रहे झमेले |
जल्दी रुपये भेज, खड़े घर-बाहर ठेले -

Comment by Vasundhara pandey on August 27, 2013 at 7:51am

वाह अरुण जी....

प्यार भी ढाई आंखर का और रुलाये भी उसी ढाई आंखर प्रेम सा .

नाम सुनते आ गये आँखों में आंसू ...शायाद सासू माँ बहुत मानती हैं मुझे...

सुन्दर दोहे की बहुत बधाई आपको...!!

Comment by Vasundhara pandey on August 27, 2013 at 7:50am

Comment by vandana on August 27, 2013 at 7:47am

वाह सर ...बेहतरीन दोहे 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 27, 2013 at 7:29am

कुमार भाई , लाजवाब दोहे ! प्याज़ की तो क़िस्मत संवार दी आपनी , प्याज़ पे पांच 2 दोहे , वाह !! बधाई !!

मंडी की छत पर चढ़ा, मंद-मंद मुस्काय
ढाई आखर प्याज का, सबको रहा रुलाय || वाह वा !!

Comment by Abhinav Arun on August 27, 2013 at 7:09am

महँगाई के दौर में , हो सजनी नाराज
साजन जी ले आइये, झटपट थोड़े प्याज ||

वाह आनंदित कर गयी प्याजावाली आ. अरुण जी सामयिक सशक्त कटाक्ष साधुवाद !!

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