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ढाई आखर प्याज का ........अरुण कुमार निगम

प्याजी दोहे.....

मंडी की छत पर चढ़ा, मंद-मंद मुस्काय
ढाई आखर प्याज का, सबको रहा रुलाय ||

प्यार जताना बाद में , ओ मेरे सरताज
पहले लेकर आइये, मेरी खातिर प्याज ||

बदल   गये   हैं   देखिये , गोरी  के  अंदाज
भाव दिखाये इस तरह,ज्यों दिखलाये प्याज ||

तरकारी बिन प्याज की,ज्यों विधवा की मांग
दीवाली  बिन दीप की   या   होली बिन भांग ||

महँगाई  के  दौर  में , हो सजनी नाराज
साजन जी ले आइये, झटपट थोड़े प्याज ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2013 at 1:32am

दीवाली बिन दीप की, या होली बिन भांग

जहाँ बाँधना देव-ध्वज, रहे प्याज हम टांग ..........  जय-जय, आदरणीय.. .

बधाई व शुभकामनाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 28, 2013 at 8:49pm

हमे तो इन्तजार है कि इस बार भी प्याज में सरकार गिराने का दम है या नहीं ,वर्ना सब रोना बेकार हाहाहा
वैसे ये प्याजी दोहे पढ़कर मजा आ गया ,बधाई आपको ,कुछ और रुलाये तो सरकार गिराए ,शुभकामनायें

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 28, 2013 at 7:52pm

बहुत सुन्दर!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 28, 2013 at 7:35pm

वाह | क्या प्याज का स्वाद चखाया है दोहे के माध्यम से, हार्दिक बधाई भाई अरुण जी | जन्माष्टमी की शुभकामनाए 

प्याजी दोहे भा गए, मन मेरा  मुसकाय,

बहुत दिनों के बाद भी, नहीं कही मिल पाय |

 

प्याज की सौगात मिले, सबकी है यह मांग 

सरकारे सब मौन है,  राजनीति का  सांग |

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 28, 2013 at 11:02am

वाह! बहुत खूब, सुंदर दोहावली पर हार्दिक बधाई आदरणीय अरुण जी

Comment by annapurna bajpai on August 27, 2013 at 10:51pm

प्यार को छोड़ अब 

ढूंढ रहे सब प्याज ,

हर घर मे होय रही 

पुकार पाजी रे  प्याज !!!!!!!!! 

 

आदरणीय अरुण जी आपकी इस सुंदर दोहवाली ने मन मोह लिया । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 27, 2013 at 10:29pm

हाहाहा हाहाहा हाहाहा 

बहुत सुन्दर प्याजावाली प्रस्तुत की है आदरणीय अरुण निगम जी 

पढ़ कर आनंद आ गया 

प्याजों पर तो रुलाने का इलज़ाम है.. दोहावली नें हँसा हँसा कर प्याज के सर से यह इलज़ाम हटा दिया :))))) हाहाहा 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by Neeraj Neer on August 27, 2013 at 7:19pm

मंडी की छत पर भी और मंदी की छत पर भी .. बहुत सुन्दर दोहे ... हार्दिक बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on August 27, 2013 at 5:41pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………
Comment by बृजेश नीरज on August 27, 2013 at 5:12pm

वाह, वाह! बहुत खूब! लाजवाब! आपको हार्दिक बधाई!

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