For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

( २१२२ २१२२ २१२ )

क्या हुआ कोशिश अगर ज़ाया गई
दोस्ती हमको निभानी आ गई |

बाँधकर रखता भला कैसे उसे
आज पिंजर तोड़कर चिड़िया गई |

चूड़ियों की खनखनाहट थी सुबह
शाम को लौटी तो घर तन्हा गई |

लहलहाते खेत थे कल तक यहाँ
आज माटी गाँव की पथरा गई |

कैस तुमको फ़ख्र हो माशूक पर
पत्थरों के बीच फिर लैला गई |

आज फिर आँखों में सूखा है 'सलिल'
जिंदगी फिर से तुम्हें झुठला गई |

-- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 686

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 6, 2013 at 10:32am

आदरणीय श्री अभिनव अरुण जी... इस विस्तृत टिप्पणी पर ह्रदय तल से आपका आभार व्यक्त करता हूँ |  :))

/*  चूड़ियों की खनखनाहट सुबह
शाम को लौटी तो घर तन्हा गयी   |...लाजवाब पर थी छूटा है क्या कहीं उला में ??    */

इसमें वाकई थी छूट गया है, मैं संसोधन कर देता हूँ |  इस ओर ध्यान दिलाने हेतु विशेष आभार !  :)

/* थोडा संदेह 'कोशिशें जाया गयी को लेकर है ...गईं होना चाहिए शायद */

इस पर मैं विचार करता हूँ आदरणीय |

पुनः हार्दिक धन्यवाद !!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on August 6, 2013 at 10:21am

अच्छी ग़ज़ल है आशीष जी दाद क़ुबूल फरमाएँ

Comment by Saurabh Srivastava on August 6, 2013 at 10:02am

पत्थरों के बीच फिर लैला गयी.... वाह साहब!

Comment by वेदिका on August 6, 2013 at 9:56am

एक और बेहतरीन प्रयास बतौर गज़ल  देखने को मिला आपकी कलम से|

स्नेही आशीष जी! बधाई कुबुलिये

Comment by Sarita Bhatia on August 6, 2013 at 7:01am

आहूत हि बढ़िया गजल सलिल जी बधाई स्वीकारें 

Comment by Abhinav Arun on August 6, 2013 at 4:52am

सशक्त भावपूर्ण ग़ज़ल हुई है आदरणीय श्री आशीष जी ...क्या कहने वाह !

क्या हुआ जो कोशिशें ज़ाया गयी
दोस्ती हमको निभानी आ गयी | ....ज़मीन खूब पकड़ी है पर थोडा संदेह 'कोशिशें जाया गयी को लेकर है ...गईं होना चाहिए शायद ..देखिएगा या कोशिश करने का प्रयास कीजिये :-)

बाँधकर रखता भला कैसे उसे
आज पिंजर तोड़कर चिड़िया गयी | ... अच्छा संकेत है भा गया शेर वाह

चूड़ियों की खनखनाहट सुबह
शाम को लौटी तो घर तन्हा गयी |...लाजवाब पर थी छूटा है क्या कहीं उला में ??

लहलहाते खेत थे कल तक यहाँ
आज माटी गाँव की पथरा गयी | ये हुई कमाल की बात शानदार



कैस तुमको फ़ख्र हो माशूक पर
पत्थरों के बीच फिर लैला गयी |...वाह वाह वाह क्या कहने

आज फिर आँखों में सूखा है 'सलिल'
जिंदगी फिर से तुम्हें झुठला गयी | .....सदके सौ सौ बार मुरीद कर लिया जी

बहुत बहुत बधाई !!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
4 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
6 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
16 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
22 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Feb 8

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service