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( २१२२ २१२२ २१२ )

क्या हुआ कोशिश अगर ज़ाया गई
दोस्ती हमको निभानी आ गई |

बाँधकर रखता भला कैसे उसे
आज पिंजर तोड़कर चिड़िया गई |

चूड़ियों की खनखनाहट थी सुबह
शाम को लौटी तो घर तन्हा गई |

लहलहाते खेत थे कल तक यहाँ
आज माटी गाँव की पथरा गई |

कैस तुमको फ़ख्र हो माशूक पर
पत्थरों के बीच फिर लैला गई |

आज फिर आँखों में सूखा है 'सलिल'
जिंदगी फिर से तुम्हें झुठला गई |

-- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 6, 2013 at 10:32am

आदरणीय श्री अभिनव अरुण जी... इस विस्तृत टिप्पणी पर ह्रदय तल से आपका आभार व्यक्त करता हूँ |  :))

/*  चूड़ियों की खनखनाहट सुबह
शाम को लौटी तो घर तन्हा गयी   |...लाजवाब पर थी छूटा है क्या कहीं उला में ??    */

इसमें वाकई थी छूट गया है, मैं संसोधन कर देता हूँ |  इस ओर ध्यान दिलाने हेतु विशेष आभार !  :)

/* थोडा संदेह 'कोशिशें जाया गयी को लेकर है ...गईं होना चाहिए शायद */

इस पर मैं विचार करता हूँ आदरणीय |

पुनः हार्दिक धन्यवाद !!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on August 6, 2013 at 10:21am

अच्छी ग़ज़ल है आशीष जी दाद क़ुबूल फरमाएँ

Comment by Saurabh Srivastava on August 6, 2013 at 10:02am

पत्थरों के बीच फिर लैला गयी.... वाह साहब!

Comment by वेदिका on August 6, 2013 at 9:56am

एक और बेहतरीन प्रयास बतौर गज़ल  देखने को मिला आपकी कलम से|

स्नेही आशीष जी! बधाई कुबुलिये

Comment by Sarita Bhatia on August 6, 2013 at 7:01am

आहूत हि बढ़िया गजल सलिल जी बधाई स्वीकारें 

Comment by Abhinav Arun on August 6, 2013 at 4:52am

सशक्त भावपूर्ण ग़ज़ल हुई है आदरणीय श्री आशीष जी ...क्या कहने वाह !

क्या हुआ जो कोशिशें ज़ाया गयी
दोस्ती हमको निभानी आ गयी | ....ज़मीन खूब पकड़ी है पर थोडा संदेह 'कोशिशें जाया गयी को लेकर है ...गईं होना चाहिए शायद ..देखिएगा या कोशिश करने का प्रयास कीजिये :-)

बाँधकर रखता भला कैसे उसे
आज पिंजर तोड़कर चिड़िया गयी | ... अच्छा संकेत है भा गया शेर वाह

चूड़ियों की खनखनाहट सुबह
शाम को लौटी तो घर तन्हा गयी |...लाजवाब पर थी छूटा है क्या कहीं उला में ??

लहलहाते खेत थे कल तक यहाँ
आज माटी गाँव की पथरा गयी | ये हुई कमाल की बात शानदार



कैस तुमको फ़ख्र हो माशूक पर
पत्थरों के बीच फिर लैला गयी |...वाह वाह वाह क्या कहने

आज फिर आँखों में सूखा है 'सलिल'
जिंदगी फिर से तुम्हें झुठला गयी | .....सदके सौ सौ बार मुरीद कर लिया जी

बहुत बहुत बधाई !!

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