For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इश्क के इम्तिहान से सनम यूँ  घबरा गया,
छोड़ कर सागर मे कश्ती खुद किनारे आ गया ....


डूबने की चाहत उसे थी इश्क के दरियाओं मे ,
देखकर रुख भँवर का फिर कैसे खौफ खा गया ...


दोस्ती ओर प्यार मे कुछ इस तरह से जंग हुई,
प्यार कुछ पा न सका ओर दोस्ती को मिटा गया .....


रब ही जाने किस हाल मे रहता है मुझसे रूठकर ,
इस तरह से जाना उसका मुझको कितना रुला गया

Views: 741

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 24, 2013 at 12:11pm
आदरणीया रोशनी जी....बहुत ही उम्दा पंक्तिया लिखी है, आपने अपनी कविता में
Comment by ram shiromani pathak on May 13, 2013 at 9:03pm

सुन्दर प्रस्तुति रोशनी जी  !सादर बधाई 

Comment by Roshni Dhir on May 13, 2013 at 6:56pm

ब्रिजेश नीरज जी मार्गदर्शन हेतु आभार 

Comment by Roshni Dhir on May 13, 2013 at 6:55pm

सावित्री जी तारीफ के लिए शुक्रिया 

Comment by Roshni Dhir on May 13, 2013 at 6:55pm

वाहिद जी प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार 

Comment by Roshni Dhir on May 13, 2013 at 6:55pm

धन्यवाद चाचा जी ..

Comment by बृजेश नीरज on May 11, 2013 at 1:35pm

आपने जिस खूबसूरती से रचना की शुरूआत की वह काबिले तारीफ है लेकिन कदम आगे कुछ डगमगा गए। लय को बनाए रखें।
रचना खूबसूरत बनी है। कथ्य बहुत अच्छा है। ढेरों बधाई आपको।
सादर!

Comment by Savitri Rathore on May 11, 2013 at 12:34pm

रब ही जाने किस हाल मे रहता है मुझसे रूठकर ,
इस तरह से जाना उसका मुझको कितना रुला गया
सुन्दर भाव ......सुन्दर प्रस्तुति !

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on May 10, 2013 at 7:16pm

सुन्दर प्रस्तुति! बधाई रौशनी जी!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 10, 2013 at 6:06pm

वाह रोशनी जी 

सस्नेह 

आनंद आ गया 

सादर बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service