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उम्मीद के चमन में सांसों सी हैं दुआएं।

उम्मीद के चमन में सांसों सी हैं दुआएं।
सुख दुःख दो शिलाएं, इक आए इक जाए।।

हम दोस्त है सभी के
क्यों दुश्मनी निभाएं
सुन्दर भाव संवारें,
अन्तर्मन व्यथाएं ।।1उम्मीद के---


फूलों औ कलियों से
सुगन्धित हैं दिशाएं
अपनी ही आस्था से
बस प्यार को बढ़ाएं।।2 उम्मीद के---


मौसम आये जाये
खुशबहार-पतझड़ से
सुजन में खिन्नता है
दुर्जन खिल खिलाएं।।3 उम्मीद के---


कुछ शहंशाह ऐसे
जो मुल्क बेचते हैं
रोते उदास बच्चे
हर कदम लड़खड़ाएं।।4


उम्मीद के चमन में सांसों सी हैं दुआएं।
सुख दुःख दो शिलाएं,इक आए इक जाए।।

के0पी0सत्यम/ मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 9:25pm

आ0 रामशिरोमणि जी,   प्रिय मित्र!  आपके स्नेह एवं सराहना के लिए तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by ram shiromani pathak on May 13, 2013 at 9:12pm

बहुत ही सुन्दर भाई केवल प्रसाद जी! हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 12, 2013 at 12:02pm

आ0 बृजेश नीरज भाई जी,   आपके उत्साहवर्धन से मन को संतोष मिला।  आपके स्नेह के लिए हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by बृजेश नीरज on May 11, 2013 at 1:18pm

बहुत ही सुन्दर भाई केवल प्रसाद जी! हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 10, 2013 at 7:17pm

आ0 कुशवाहा जी,   आपके स्नेह और सराहना से मैं धन्य हुआ।  तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 10, 2013 at 7:14pm

आ0 कुन्ती जी,  आपका स्नेह और सराहना  पाकर मैं धन्य हुआ।  तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 10, 2013 at 7:11pm

आ0 अरून अनन्त भाई जी,  आपका स्नेह पाकर मैं धन्य हुआ।  तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 10, 2013 at 6:14pm

कुछ शहंशाह ऐसे
जो मुल्क बेचते हैं
रोते उदास बच्चे
हर कदम लड़खड़ाएं

आइये सब मिल देश बचाएं 

वंदे मातरम 

Comment by coontee mukerji on May 9, 2013 at 11:37pm

केवल जी , फूलों औ कलियों से
सुगन्धित हैं दिशाएं
अपनी ही आस्था से
बस प्यार को बढ़ाएं.......काश यह भाव हर किसी के मन में बस जाए ......तो शायद धरती माँ अपनी सपूतों के शोक से बच जाएँ./

सादर / कुंती

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 9, 2013 at 10:06pm

बहुत ही सुन्दर भाई केवल प्रसाद जी आपकी लेखनी निखर रही है, ओ बी ओ का प्रभाव दिखने लगा है, हार्दिक बधाई स्वीकारें.

कृपया ध्यान दे...

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