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छत्तीस बरस की गुलाबी चुनरिया (शादी की छत्तीस्वी साल गिरह )ओ बी ओ पर १ ० ० वीं पोस्ट

                                          (फूलों से दिन का शुभारम्भ) 

फिर लहराई 

सुभागी ,गुलाबी 

गोटेदार चुनरिया 

जिसका सितारों भरा आसमाँ 

प्रत्यक्षदर्शी है उन 

अविस्मरणीय लम्हों का 

जिसकी एक छोर से 

किया गया था गठबंधन 

प्रियतम की पीली चादर 

की छोर से,

उस छोर की सिलवटें 

जस की तस 

आज भी उन पलों को जीती हैं 

एक सितारा भी नहीं गिरने दिया 

इस अम्बर से मैंने 

क्योंकि मैं जानती हूँ 

आपने अपना आशीर्वाद भी  टाँक रखा है 

हर सितारे के साथ में

कितने मौसम बदले

रुत बदली 

किन्तु इसकी आभा में 

कोई भी तो कमी नहीं आई 

वही कोमलता 

वही मखमली एहसास हुआ 

जब आज फिर स्पर्श किया 

आज छत्तीस वर्ष की हो गई है 

ये चुनरिया ,मम्मी पापा 

आपको याद है ना !!!

******************

 

(मौलिक व अप्रकशित)

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 5, 2013 at 8:53am

ब्रजेश कुमार सिंह जी आपकी शुभकामनाएं ,बधाई दिल से स्वीकार सहेज कर रख ली हैं  ,बस यूँ ही मिलती रहें ये शुभकामनाएं ये बधाइयां ,दिल से आभारी हूँ |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 5, 2013 at 8:52am

प्रिय सीमा  जी आपकी शुभकामनाएं ,बधाई सर आँखों पर ,बस यूँ ही मिलती रहें ये शुभकामनाएं ये बधाइयां ,दिल से आभारी हूँ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 5, 2013 at 8:51am

आदरणीय कल्पना रमानी जी आपकी शुभकामनाएं ,बधाई सर आँखों पर ,बस यूँ ही मिलती रहें ये शुभकामनाएं दिल से आभारी हूँ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 5, 2013 at 8:49am

 किशन कुमार जी  आपकी शुभकामनाएं ह्रदय से स्वीकार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 5, 2013 at 8:48am

प्रिय अरुन   आपकी शुभकामनाएं ह्रदय से स्वीकार |

Comment by बृजेश नीरज on May 5, 2013 at 12:10am

आदरणीया आपको हार्दिक बधाई!
इस अवसर पर इतनी सुन्दर रचना! अंतिम पंक्तियां पढ़कर दिल भाव विभोर हो गया।
आपकी चुनरिया यूं ही युवा बनी रहे और आप यूं सालों साल हर सालगिरह पर ऐसे ही दिल को छूने वाली रचनायें प्रस्तुत करती हैं।
आपको बधाई और आभार!

Comment by seema agrawal on May 4, 2013 at 11:41pm

पावें जी शुभकामना, बारम्बार हजार,

बता रहीं छत्तीस का,तिरसठ सा है प्यार,

तिरसठ सा है प्यार, सलामत रहे हमेशा,

मीठी सी तकरार, जरी जीवन का रेशा,

जीवन हो खुशहाल, नित्य ही मंगल गावें.

सात जन्म यह मीत, देव से लड़कर पावें ||........अशोक रक्ताले जी की कुण्डलिया के माध्यम मैं भी अपनी दिली शुभकामनाएं प्रेषित कर रही हूँ आपको 

आपकी इस प्यारी सी चूनर को भी ढेरों ढेर बधाई .........आपकी  प्यारी सी तस्वीर के साथ ही हम सब भी आपके विवाह में शामिल हो लिए 

Comment by कल्पना रामानी on May 4, 2013 at 9:57pm

क्या भाव सँजोए हैं, राजेश कुमारी जी, आपकी यह चुनरिया आजीवन युवा बनी रहे

 बहुत बहुत शुभकामनाएं. बहुत सुंदर रचना की प्रस्तुति ने तो  मन मुग्ध कर दिया है. हार्दिक बधाई.॥

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 4, 2013 at 9:44pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं उस पर इतनी सुन्दर रचना ह्रदय को स्पर्श कर गई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 4, 2013 at 6:58pm

आदरणीय लक्ष्मण जी पुनः हार्दिक आभार |

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