For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रेम से भ्रष्टाचार.

राग-रागिणी प्रेम की, उन्नत भ्रष्टाचार,

बहलाए फुसलाय के, देती माँ आहार,

देती माँ आहार, बाल शिशु जब भी रोये,

लोरी देत सुनाय, नहीं जो शिशु को सोये,

पति को रही लुभाय, मधुर व्यंजन से भगिणी,

उन्नत भ्रष्टाचार, प्रेम की राग-रागिणी//

Views: 421

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on March 8, 2013 at 10:57pm

आदरणीय प्रदीप जी आदरणीय डॉ. अजय खरे जी आपका छंद पसंद करने के लिए हार्दिक आभार.

Comment by Dr.Ajay Khare on March 8, 2013 at 12:03pm

taktale ji ati sunder rachana badhai

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 7, 2013 at 2:53pm

प्रेम राग नहीं रोग ही जानो 

फंसे जाल अंत अपना मानो 

अंत अपना मानो विकल्प न दूजा 

माँ बहना बेटी की  मिल करो पूजा 

बधाई आदरणीय अशोक सर जी 

सादर 

Comment by Ashok Kumar Raktale on March 6, 2013 at 10:44pm

आदरणीय राजेश झा जी सादर छंद अभिव्यक्ति पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार.

आदरणीय लड़ीवाला साहब सादर आपकी सुन्दर छंद युक्त प्रतिक्रया से लगता है की बस होली आ ही गयी है. यूँ ही स्नेह बनाए रखें.

भाई राम शिरोमणि पाठक जी सादर,अभिव्यक्ति पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार, आप यदि किसी भी पंक्ति का अर्थ न समझ सकें तो यह मेरे लेखन की त्रुटी है.अवश्य ही मैं इसे गम्भीरता से लूँगा और सुधार करने का पूर्ण प्रयास करूंगा. मेरा प्रयास इस पंक्ति में यह कहने का रहा है की माताए जब दिन भर शिशु की सेवा सुश्रुसा करके थक जाती हैं तो वे उसे रात को लोरी सुना कर शीघ्र सुलाने का प्रयास करती हैं ताकि वे भी कुछ आराम कर सकें. लोरी को मैंने घुस के रूप में बताने का प्रयास किया है.

Comment by ram shiromani pathak on March 6, 2013 at 7:35pm

आदरणीय अशोक रक्ताले जी,सुंदर अभिव्‍यक्ति के लिए हार्दिक बधाई, सादर

लोरी देत सुनाय, नहीं जो शिशु को सोये.............आदरणीय इस पंक्ति को समझ पाने में थोड़ी कठिनाई हो रही है .....

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 6, 2013 at 7:13pm

सदाचार मन में रख प्रेम में किया भ्रष्टाचार चलता है आदरणीय अशोक रक्ताले जी, हार्दिक बधाई,  साथ देखे - 

राग रागिणी प्रेम की, उन्नत भ्रष्टाचार 

देन कहे प्रभु कृष्ण की,कहते शिष्टाचार |

कहते शिष्टाचार,बसता प्रेम अँखियों में,

पिचकारी की मार, सखियां होली रंग में |

बुरा न कोई मान, राग में प्रेम सुहाणी,

करो न सोच विचार,प्रेम में राग रागिणी |-लक्ष्मण लडीवाला 

 

 

Comment by राजेश 'मृदु' on March 6, 2013 at 6:31pm

प्रेम में सब चलता है आदरणीय, सुंदर अभिव्‍यक्ति के लिए हार्दिक बधाई, सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service