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बेबसी हंसने लगी ...

बातों से भी ये गम क्यूँ कम नही होते,

आंसुओ से दिल के कोने नम नही होते.

थी बहुत उम्मीद तो अपनों से इस दिल को कभी,

पर हमेशा साथ ये हमदम नही होते...

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते...                      

                 

प्यार है बस जहां रंजीश नही कोई कभी,

क्या कभी ऐसे दिलों में गम नही होते.

याद तो करते है हम उनको सदा ही रात दिन,

ख्वाब में उनके कभी क्या हम नही होते...

 

अब तो  भूख भी लगना भूल गई ,

और प्यास ने लगना छोड़ दिया.

हर दिन बना जीवन उपवास उनका,

क्या कभी ऐसों पर खुदा मेहरबान नही होते...

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Comment

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Comment by Aarti Sharma on March 16, 2013 at 11:57pm

आदरणीय विजय भाई ...मेरी रचना पर पुनः टिपन्नी के लिए तहेदिल से शुक्रिया..जी बिलकुल भाई में जल्द ही एक और कविता लिख रही हु आशा है आपको पसंद आएगी..

Comment by vijay nikore on March 9, 2013 at 1:21pm

आदरणीया आरती जी:

 

इस कविता पर मैं पहले प्रतिक्रिया दे चुका था,

पर आज इसे पुन: पढ़ने पर कुछ और कहने को

मन किया।

 

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते..

 

आपकी इस कविता के मार्मिक भाव अप्रतिम हैं।

ऐसी ही और कविताओं की प्रतीक्षा में हूँ।

 

सादर,

विजय निकोर

 

 

 

 

Comment by Aarti Sharma on February 21, 2013 at 5:04pm

आपका तहेदिल से शुक्रिया डॉक्टर अजय जी..

Comment by Aarti Sharma on February 21, 2013 at 5:03pm

आपका हार्दिक धन्यवाद नादिर सर..

Comment by नादिर ख़ान on February 20, 2013 at 3:30pm

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.....

याद तो करते है हम उनको सदा ही रात दिन,

ख्वाब में उनके कभी क्या हम नही होते...

 

बहुत खूब  कहा  आरती जी ....

Comment by Dr.Ajay Khare on February 20, 2013 at 3:00pm

ARTI JI RACHNA BAHUT SUNDER AND TOUCHING HAI BADHAI

Comment by Aarti Sharma on February 20, 2013 at 1:50am

आपका हार्दिक धन्यवाद अजय जी..

Comment by ajay yadav on February 19, 2013 at 11:33pm

 बहुत खूबसूरत  रचना ...बधाई ...|मैं कहना चाहूँगा कि -A chink in the wall is enough to see the world.

Comment by Aarti Sharma on February 19, 2013 at 12:01pm

आपका तहेदिल से धन्यवाद राजेश  मैंम ...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 19, 2013 at 11:46am

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते...---

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते...                      

         ये पंक्तियाँ बहुत सुंदर बन पड़ी हैं बहुत भाव पूर्ण रचना आरती जी बहुत बधाई 

                     

         

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